छंद Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 20, 2015 छंदमाता शारदे जो वीणा हमको उधार मिले,जितने बेतार- तार-तार करि डारेंगे।गर कुछ बच गया उसे काठ में मिला के,अपनी लिए भी एक सितार करि डारेंगे।।हाथ गर शीश पर मेरे जो रहा तो माई,हारे हैं ‘‘कपूत’’ न तो फिर कभी हारेंगे। तार दिया हमको तो ठीक ठाक सब रहें,वर्ना जिसे पाएंगे उसी को तारि डारेंगे।।कपूत प्रतापगढ़ी Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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