कलियुगी कपूत का असली रंग






बाबा तुलसीदास जी रामचरित मानस में लिख कर चले गए कि -भांड़, भतीजा, भांजा, भउज, भट्ट भूमिहार, तुलसी छहों भकार से सदा रह्या होशियार। अर्थात मजाकिया, भतीजा, भांचा, भाभी, हरबोल यानि जो राजदरबारों के गायक हुआ करते थे, और बिहार में एक जाति होती है भूमिहार, इन छहों से होशियार रहने की सलाह दे गए बाबा तुलसीदास।  ऐसा ही एक मामला सामने आया सूरजपुर के कल्याणपुर में जहां एक 85 साल की महिला की मौत हो गई। उसकी दो बेटियां थीं पति ने अपनी सारी जमीन अपने भांजों के नाम कर दी। खुद अपने भतीजे के पास रहते थे। घटना 5 दिनों पहले की बताई जाती है। जब चाची भी चल बसीं। तो भतीजे ने निश्चय किया कि जब तक उसकी बहनें उसको सड़क के किनारे की 5 डिसमिल जमीन नहीं देंगी वो चाची की चिता को मुखग्रि नहीं देगा। बस फिर क्या था मां की मौत की खबर पाकर बेटियां पहुंची और शुरू हो गया झगड़ा। वो भी हल्का नहीं काफी तगड़ा। इसको सलटाने के लिए पंचों ने पंचायत तक की मगर लड़का टस से मस नहीं हुआ। उसकी तो बस एक ही रट थी 5 डिसमिल जमीन। आखिरकार थक हार कर 48 घंटे बाद बेटियों ने वो जमीन उस लालची भाई को दी, तब जाकर उसने अपनी चाची की चिता को मुखग्रि दी।
शर्म आती है ऐसे समाज और ऐसे लोगों पर। जो मानवता को तार-तार कर देते हैं। ऐसे कलियुगी कपूतों की जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। आदमी चांद तक जा पहुंचा। मंगल तक मनुष्यों के बनाए यान जा पहुंचे हैं। मगर इंसान आखिर इंसान कब बनेगा ये सवाल आज भी सूरजपुर के गलियारों में सिर उठाए जवाब तलाश रहा है। पंच और सरपंचों का भी इस मामले में कम दोष नहीं है। वे भी इस घटना में बराबर के गुनहगार हैं। यदि इन्हीं लोगों ने तल्ख़्ाी दिखाई होती तो हो सकता है कि उस वृध्दा का अंतिम संस्कार जल्दी हो गया होता? लेकिन महज 5 डिसमिल जमीन के लिए 48 घंटे तक  इस तरह लाश को रोके रखना बेहद निंदनीय कार्य है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। सरकार को भी इस मामले को संज्ञान में लेकर उस लालची व्यक्ति के खिलाफ कानून की वैधानिक धाराओं के तहत मामला कायम किया जाना चाहिए, ताकि ये बात समाज में कम से कम ये संदेश दे जाए कि कोई कलियुगी कपूत फिर दोबारा  ऐसे कामों को अंजाम देने से पहले दो सौ बार सोचे।

Comments

राम राम भाई साहब,

बाबा तुलसीदास का यह प्रसंग किस कांड में है?

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