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संतों जागत नींद न कीजै

खटर-पटर निखट्टू- संतों.....अजब जमाना आ गया है। लोग अपना घर बचाने के लिए दूसरे के घरों पर पेट्रोल छिड़क रहे हैं। ऐसे संकटमय समय में कबिरा का लुआठी हाथ में लेकर खड़ा होना बिल्कुल विरोधाभास को बढ़ाता है। जब उन्होंने कहा था कि कबिरा खड़ा बजार में लिए लुआठी हाथ, जो फूंके घर आपना चलो हमारे साथ। मगर यहां तो लोगों को अपना घर बचाने और दूसरे का घर जलाने में बड़ा आनंद आता है। ये तथाकथित बुध्दिजीवी कबीर के भाव पक्ष पर ताव तो खाते हैं । पर कला पक्ष को ये मान कर छोड़ देते हैं कि इससे किसी का भी भला नहीं होने वाला। कबिरा ऐसे समय में भी चला ही जा रहा है। उसे तो इस बात का ङ्क्षकचित भान भी नहीं है कि वो अपनों के हाथों छला जा रहा है। अच्छा इस छलने में भी बड़ा अजीब रहस्य है। छलने वाला ये सोचकर खुश है कि हमने तो कबीर को भी नहीं छोड़ा? तो वहीं कबीर का इससे कुछ बिगडऩे वाला नहीं ऐसे में अगर कोई खुश हो लेता है तो उनकी बला से। कबीर के हरि को खोजने वाले लोग तो अब लगभग नदारद से हो गए हैं। अब न तो वे हरि हैं जो कबीर के पियु हुआ करते थे और न उस हरि की बहुरिया अर्थात संत कबीर जैसे व्यतित्व। यहां तो लोग राम की रसोई ...

14 नक्सलियों के साथ उनके डॉक्टर ने किया सरेंडर

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 सुरक्षाबलों की बढ़ती पकड़ से अब नक्सलियों की अकड़ ढीली होने लगी है। यही कारण है कि शुक्रवार को 14 नक्सलियों और उनके एक डॉक्टर ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है। इस माओवादी डॉक्टर की शिनाख्त जगत के नाम पर हुई। जगत ने बताया कि वो वर्ष 2010 से ही माओवादियों का इलाज कर रहा था। वो खुद को नौंवी पास बताता है। उसने ये भी बताया कि नक्सलियों ने उसको महाराष्ट्र में चिकित्सा करने का प्रशिक्षण दिलाया है।  जगदलपुर ।  नौंवी पास था नक्सलियों का डॉक्टर- डॉक्टर माओवादी जगत बुखार और सर्दी खासी सहित मलेरिया जैसी बीमारी का इलाज किया करता था।  उसने बताया है कि वह माओवादियों के अलावा जब तब गांव में होने वाली बैठकों के दौरान आम ग्रामीणों का भी इलाज किया करता था। नौवीं पास डॉक्टर माओवादी जगत ने महाराष्ट्र से इसकी ट्रेनिंग ली थी और ये ट्रेनिंग माओवादियों के द्धवारा ही जगत को दिलवायी गई थी।  सर्दी खांसी और मलेरिया जैसी बीमारियों में किन दवाओं का उपयोग किया जाता है।  ये बात माओवादी डॉक्टर बखूबी जानता है। मलेरिया किट के बिना करता था इलाज- उसका दावा है कि उसके किए हुए इलाज से बीमार...

नक्सलियों के विस्फोटक लेकर ग्रामीण पहुंचे थाने

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- सुकमा जिले के फूलबागड़ी थाने में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बांदेमगुड़ा के ग्रामीण नक्सलियों से छीने गए जिंदा आईईडी लेकर थाने पहुंचे। आनन-फानन में उन जिंदा बमों को डिफ्यूज किया गया। उसके बाद वहां मौजूद लोगों की जान में जान आई। तो वहीं पुलिस के आलाअधिकारी अब ग्रामीणों के साहस की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। सुकमा। क्या है पूरा मामला- बताया जाता है कि  बांदेमगुड़ा के जंगलों में नक्सली तीन आईईडी लगा रहे थे, लेकिन इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया, और एक राय होकर इक_े वहां पहुंचे और इनको ललकारा।  ग्रामीणों को अपनी ओर आता देख सभी नक्सली मौके से विस्फोटक छोड़कर भाग गए। ग्रामीण इन विस्फोटकों को लेकर सुकमा पहुंचे । ग्रामीणों के हाथें में ये घातक विस्फोटक देखते ही वहां हड़कंप मच गया। तो वहीं शांति पूर्वक ग्रामीणों ने  इसे पुलिस को सुपुर्द कर दिया, जहां पुलिस ने इन्हें डिफ्यूज कर दिया। पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों के साहस को सराहा इस मामले में सुकमा पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि नक्सलियों के मंसूबों पर इस बार इलाके के ग्रामीणों ने ही पानी फेर दिया।अब...

आधा दर्जन चोरी के बाद भी पुलिस सो रही...!

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 जिले के एक मात्र रघुनाथ मेडिकल कालेज की सुरक्षा भी राम भरोसे ही चल रही है। ये बात यहां के मरीजों और डॉक्टर्स तक को खल रही है। दो महीने में छह से ज्यादा चोरियों की हो चुकी हैं वारदातें। तो वहीं अस्पताल के भीतर खून के दलाल कमा कर हो रहे हैं लाल। मरीजों से हो रही सरेआम ठगी। यानि अंदर भी चोरी और बाहर भी चोरी उसके बाद भी यहां पुलिस सो रही। ऐसे में सवाल तो यही कि आखिर इन चोरियों से इन लोगों को कौन निजात दिलाएगा? राम भरोसे रघुनाथ मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा, न अंदर और न ही बाहर कोई सुरक्षित अम्बिकापुर। क्या है पूरा मामला- मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में वाहन चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दो माह में लगातार आधा दर्जन मोटरसाइकिलें अस्पताल परिसर से अज्ञात चोरों ने चोरी कर ली है। दूसरी तरफ अस्पताल के अंदर भी अज्ञात लोगों द्वारा मरीजों से ठगी व लूट की घटना लगातार प्रकाश में आ रही है। इस लिहाज से न तो अस्पताल अंदर से सुरक्षित है और न बाहर से। डॉक्टर को भी नहीं छोड़ रहे चोर- आज शुक्रवार की सुबह अस्पताल परिसर से एक व्यक्ति की साइकिल सहित एक चिकित्सक की बाइक चोरी हो गई । ...

बस्तर में अमन की बढ़ती उम्मीदें

अबूझमाड़ को बूझने वाले नक्सलियों की हर चाल को नाकाम करने का $फन हमारे सुरक्षा बलों के जवान बखूबी समझते हैं। यही कारण है कि लगातार इनकी आपूर्ति लाइन को काटने में कामयाब होने के बाद सुरक्षा बलों ने यहां के ग्रामीणों को जागरूक करने का फैसला किया। सुरक्षाबलों के इसी अभियान का नतीजा निकला कि सुकमा में ग्रामीण ही नक्सलियों की आईईडी छीनकर लिए-दिए थाने आ धमके। उन्होंने इसको पुलिस के हवाले किया जहां इसको बाद में निष्क्रिय कर दिया गया। तो वहीं 14 नक्सलियों के साथ-साथ उनके तथाकथित डॉक्टर ने भी आज माओवादियों से अपना दामन छुड़ा लिया। ऐसे में अब माओवादियों के सामने इलाज का भी संकट उठ खड़ा होगा। पहले से ही सुरक्षा बलों ने उनकी पूरी सप्लाई लाइन काट रखी है। ऐसे में इसका नुकसान भी इनको उठाना पड़ेगा। पहले बारिश में नक्सली अपने संगठन को बढाने का काम करते थे और जैसे ही बारिश खत्म होती थी ताबड़तोड़ हमले कर अपने धमक कायम करने में लग जाया करते थे। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। ऐसा सिर्फ और सिर्फ हमारे जांबाज जवानों और आलाअधिकारियों की मेहनत के कारण हुआ है। हमारे अधिकारियों को अब ये बात पूरी तरह पता है कि नक्सलियो...

My Byline Feature and Khatar-Patar in Page -4 of Hamari Sarkar's 21st OCtober's edition

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Front and Last page of Hamari Sarkar of 21st October 16

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