शिक्षाकर्मी की बेशर्मीं

 मित्रों ! छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी छठवें वेतनमान की मांग लेकर आन्दोलन कर रहे हैं। राज्य का शिक्षा विभाग भी ऊंघ रहा है।मगर एक कड़वी सच्चाई ये है की ये शिक्षाकर्मी आखिर पढ़ते कितना हैं? कक्षा पांच के बच्चे से पूंछ लीजिये तो ढंग से हिंदी ,में वो  अपना नाम तक नहीं लिखा पाता। बच्चे मारपीट करते हैं और शिक्षाकर्मी घर का हालचाल बतियाते आपको अक्सर मिल जायेंगे। वहीं दुसरे हैं मास्टर साहब जो स्कूल का मुंह विशेष अवसरों पर ही देखने जाते हैं।देश में शिक्षा का क्या हाल है ये बताने की जरूरत नहीं है। जिस अविभावक की क्षमता अपने बच्चो को  पढ़ा पाने  की नहीं है वही भगवन भरोसे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजता है। अजीब बात है, बिना काम के मजदूरी? और सही भी है जब देश का नेता संसद में हंगामा करके पूरा वेतन और भत्ता भुनता है। तो फिर इनको क्यों न दिया जाये। लाख टके का सवाल है कि  वो सरकारी विभाग बताओ जहां ईमानदारी से काम होता हो? शायद नहीं मिलेगा। अरे जब लूट ही मची है तो इनको क्यों रोक रहे हो  भाई? लूटने दो इनको भी?
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