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पेजर ब्लाॅस्ट का वाॅयनाड कनेक्शन: घर्र-घर्र फिर धांय-धांय उसके बाद हाय-हाय

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  रायपुर। पेजर ब्लाॅस्ट का वाॅयनाड कनेक्शन : 17 सितम्बर को लेबनान में हुए पेजर ब्लाॅस्ट का वाॅयनाड कनेक्शन सामने आया है।  इसमें केरल के वाॅयनाड का मूल निवासी रिनसन जोस का नाम सामने आ रहा है।  लेबनान में 17  सितम्बर को 3000 पेजर्स में अचानक घर्र-घर्र की बीप बजी और फिर उसके बाद ये धमाके के साथ फट गए।  उसके बाद मौके पर हाय-हाय की आवाजें आने लगीं। इसमें कुल 19 लोगों की मौत हुई थी और 3 हजार लोग घायल हुए थे।  इस हमले में मारे गए ज्यादातर लोग हिजबुल्लाह के लड़ाके बताए जा रहे हैं। जो इजरायल की खतरनाक  एजेंसी मोसाद के डर से पेजर का  इस्तेमाल किया करते थे।   पेजर ब्लाॅस्ट का वाॅयनाड कनेक्शन: कैसे इसे भी समझें दरअसल हिजबुल्लाह के लड़ाकों को जिस कंपनी ने पेजर्स की सप्लाई की थी, उसका नाम नाॅटा्र ग्लोबल कंपनी बताया जा रहा है। इसका मालिक रिनसन जोस मूलरूप से भारत के केरल राज्य के वाॅयनाड का निवासी बताया जा रहा है।  ये वही वाॅयनाड है जहां से पहले राहुल गांधी सांसद हुआ करते थे।  आइए डालते हैं तमाम जरूरी बातों पर एक नजर  अचानक  हुए पेजर ध...

बिना पुलिस की इजाजत के शूटिंग पड़ेगी महंगी

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इस फिल्म के अभिनेता, अभिनेत्री, निर्माता, निर्देशक को हो सकती है जेल  रायपुर। बिना अनुमति फिल्म की शूटिंग करना कितना नुकसान पहुंचा सकता है। इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है। क्योंकि हालत यह है कि फिल्म अभी तक रिलीज भी नहीं हुई और एक्टर, एक्ट्रेस, प्रोड्यूसर, डॉयरेक्टर को हकीकत में हवालात की हवा खानी पड़ सकती है। दरअसल, रील लाइफ की वजह से रियल लाइफ में जेल जाने का ये पहला मौका है। जब रायपुर पुलिस शहर में बिना इजाजत शूटिंग कर रहे अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और गायब टीम की तलाश जारी है। क्या है पूरा मामला- जानकारी के मुताबिक, बिना सूचना बीच शहर में गोलीबारी के विजुअल शूट करने की खबर से पुलिस इस कदर खफा है कि वो इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर डायरेक्टर, प्रोड्यूसर के साथ-साथ नकली गोली मारने वाली एक्ट्रेस की भी तलाश कर रही है। या ये कह लीजिए कि उस फिल्मी कहानी में विलेन का रोल हो या न हो, लेकिन पुलिस विलेन बनकर फिल्म का क्लाइमेक्स बढ़ाने जा रही है। महावीर नगर में मर्डर का किया पिक्चराइजेशन- आपको बता दें, राजधानी के महावीर नगर में कुछ दिन पहले फिल्म की शूटिंग हु...

अफसरशाही दिखाने वाले निपट गए, अधिकारियों पर हावी हमारे मंत्री

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यूं तो शासन और प्रशासन के बीच तल्खियां कोई नई बात नहीं है। यही वजह है कि कभी मंत्री व विधायक अधिकारियों की शिकायत करते हैं, तो कभी अधिकारी मंत्री व विधायकों की शिकायत करते हैं, कभी-कभार तो दोनों एक दूसरे पर गंभीर आरोप तक जड़ देते हैं। दरसअल, इस तकरार का जिक्र इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि बीजेपी के बस्तर प्रभारी सुनील सोनी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अफसरशाही दिखाने वाले कुछ अधिकारी निपट गए हैं और अब हमारे मंत्री अधिकारियों पर हावी हो रहे हैं। सुनील जगदलपुर में पार्टी के कामकाज की समीक्षा करने के साथ ही कार्य कर्ताओं को चुनावी टिप्स देने पहुंचे थे। --------------------------------------------- बस्तर/जगदलपुर। क्या है पूरा मामला- जानकारी के मुताबिक, पखवाड़े भर पहले जगदलपुर के बकावंड में 55 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा हटाने गए अधिकारियों के खिलाफ भाजपा नेताओं ने मोर्चा खोलते हुए हंगामा किया था। हालात ये हो गए थे कि स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन को पुलिस बल भी बुलाना पड़ा था। प्रशासन की इस कार्रवाई से बस्तर में भाजपा के कई दिग्गज नेता नाराज थे और इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री से...

रेत माफिया कर रहे महानदी का सीना छलनी

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 राज्य की जीवन रेखा कही जाने वाली महानदी का सीना अवैध रेत माफिया खाली करते जा रहे हैं। तो वहीं माइनिंग विभाग के अधिकारी इससे अनजान बनने का स्वांग रच रहे हैं। अवैध हथियारों के दम पर ये माफिया महानदी की रेत खुलेआम बेंच कर पैसे कमा रहे हैं और सरकारी खजाने को चूना लग रहा है। पर्यावरण का जो नुकसान हो रहा है सो अलग। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा?  महासमुंद । प्रशासन नहीं कर रहा कोई कार्रवाई- छत्तीसगढ़ के महासमुंद में खनिज माफियाओं का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा।  दिनों दिन माफियाओं के बढ़ते कदम से महानदी की छाती छलनी-छलनी होती नजर आ रही है। हैरत की बात तो यह है कि जिला प्रशासन भी इन माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही।  जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद है। महानदी किनारे बसे महासमुंद को प्राकृतिक संपदाओं से भरा जिला माना जाता है। जहां कई प्रकार के खनिज संपदाओं का खदान है।  महानदी के किनारे दर्जनों गांवों की बसाहट है।  इन्हीं में से एक गांव है मुढ़ैना जहां फर्शी पत्थर और रेत का खदान ही गांव वालों के आजीवका का साधन है।  लेकिन गांव वाल...

पहले शराब लाओ तब होगा पोस्टमार्टम

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-गरीबों की मौत पर अधिकारी और कर्मचारी कैसे जश्र मनाते हैं इसका जीता जागता नमूना बिलासपुर के आदिवासी विकासखंड गौरेला में देखने को मिला। यहां एक पुलिस वाले ने सड़क हादसे में मरी एक बैगा महिला का पोस्टमार्टम करवाने से पहले ही शराब के बोतल की मांग कर दी। उसका कहना था कि पहले शराब की बोतल लाओ फिर होगा पोस्टमार्टम। शिकायत के बाद अब पुलिस के अधिकारी कार्रवाई की बात कर रहे हैं। सवाल है कि आखिर राज्य की पुलिस इतनी संवेदनहीन क्यों हो चुकी है? पुलिसवालों ने मांगी शराब, कहा-बोतल लेकर लाओ तभी होगा पोस्टमार्टम बिलासपुर। क्या है पूरा मामला- दरअसल पूरा मामला गौरेला थानाक्षेत्र के चुक्तीपानी गांव का है।  जहां गुरूवार शाम जगंल से लकड़ी लाते समय अज्ञात बोलेरो वाहन की ठोकर से गांव की रहने वाली इतवरिया बाई बैगा की मौत हो गयी।  जिसकी जानकारी गांव के लोग और परिजनों ने गौरेला पुलिस को दी। पुलिसवालों ने मांगी शराब, कहा-बोतल लेकर लाओ तभी होगा पोस्टमार्टम जिसके बाद गौरेला पुलिस ने शव का मर्ग पंचनामा की कार्रवाई कर शव को गौरेला थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी बिहारी लाल उपाध्याय को शव का पोस्टमार्टम कराने क...

अभियान पर अभिमान

दंतेवाड़ा का दिव्यांग सोमारू प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में दिलोजान से जुटा हुआ है। दोनों पैरों से अपंग होने के बावजूद भी उसने शौचालय के लिए सेप्टिक टैंक खोद लिया। उसके बाद उसमें ईटों की जोड़ाई भी हो गई है। इसमें चौंकाने वाली बात ये है कि सोमारू ने सेप्टिक टैंक की खुदाई खुद की है। सोचकर भी आश्चर्य होता है कि एक दिव्यांग कैसे इतने गहरे सेप्टिक टैंक की खुदाई कर लेगा? अगर करेगा तो मिट्टी कैसे निकालेगा, मगर सोमारू ने इस काम को भी बखूबी अंजाम दिया। यहां ये भी बताना जरूरी है कि सोमारू कभी बैलाडीला लौह खदान ममें मजदूरी करता था। एक विस्फोट की चपेट में आने के कारण उसके दोनों पैर कट गए। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को लोगों ने जमकर सम्मान दिया। किसी ने बकरियां बेंची तो किसी ने गहने और किसी ने जमीन। इन सबसे अलग एक दोनों पैरों से दिव्यांग ने अपनी मेहनत के दम पर सेप्टिक टैंक खोदकर मिसाल कायम की। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी। कभी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी कहा था कि इंसान शरीर से नहीं दिमाग से चलता है। उनके इस कथन को इस युवा ने शब्दश: स...

Front and Last page of Hamari Sarkar of 6th Januaury -17

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क्या रोहिंग्या मुसलमान नहीं हैं इंसान

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म्यांमार में हो रहा है गैंगरेप, टॉर्चर और मर्डर, दुनिया भर के कई देश आतंकी घटनाओं या गृहयुद्ध का सामना कर रहे हैं। जिसके चलते दुनिया भर में रिफ्यूजी की संख्या लाखों की तादात में बढ़ती जा रही है। इनमें भारत के पड़ोसी देश म्यांमार का नाम भी शामिल है। यहां बौद्ध धर्म के अनुयायी और अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच कत्लेआम जारी है। इससे रोहिंग्या मुस्लिम देश छोड़कर बांग्लादेश में शरण ले रहे हैं। और तो और यहां सेना भी कर रही है रोहिंग्या मुसलमानों का कत्लेआम...। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि क्या रोहिंग्या मुसलमान इंसान नहीं हैं? अगर हैं तो फिर क्या दुनिया के मानवाधिकारवादियों की आंखों पर पट्टी बंधी है जो उनको  ये घटनाएं नहीं दिखाई दे रही हैं? ढाका/ नई दिल्ली।  क्या है पूरा मामला-  संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था यूएनएचसीआर के मुताबिक, म्यांमार में अब सेना भी रोहिंग्या मुसलमानों की हत्याएं कर रही है। सुरक्षा बल रोहिंग्या समुदाय के पुरुषों व बच्चों तक का कत्ले-ए-आम कर रहे हैं। महिलाएं रेप का शिकार हो रही हैं और मुस्लिमों के घरों को आग के हवाले किया जा रहा है। इस...

स्वच्छता अभियान की शान है दिव्यांग सोमारू

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- दंतेवाड़ा के कुआकोंडा के बड़ेहड़मामुंडा गांव में एक दिव्यांग सोमारू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में जीजान से जुटा हुआ है। दोनों पैरों से अपंग होने के बावजूद भी सोमारू स्वप्रेरणा से शौचालय का सेप्टिक टैंक बना रहा है। बैलाडीला लौह खदान में हुए विस्फोट में अपने दोनों पैर खोने वाले नौजवान सोमारू वास्तव में स्वच्छ भारत अभियान की जान हैं। देश को ऐसे युवाओं पर गर्व है। दोनों पैर से अशक्त सोमारू ने लिया स्वच्छता का संकल्प, खुद से तैयार किए टैंक  दंतेवाड़ा । लोग दशरथ मांझी से करते हैं तुलना-  जिले के विकासखंड कुआकोंडा के बड़ेहड़मामुंडा गांव के रहने वाले सोमारू दोनों पैरों से अशक्त हैं।  इसके बाद भी उनका हौसला देख कर आश्चर्य होता है।  वे स्वप्रेरणा से स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वयं अपने लिए शौचालय निर्माण का कार्य कर रहे हैं। एक दिव्यांग आदिवासी का स्वच्छता के प्रति इस तरह जागरूक होना और क्षमता से अधिक प्रयास करना किसी भी तौर पर बिहार के दशरथ मांझी से कमतर प्रयास नहीं है, जिन्होंने पहाड़ खोद कर रास्ता बना दिया था।  सोमारू दो जून की ...

अब घर बैठे पैसा देगी मोदी सरकार, पूरा प्लॉन तैयार

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नई दिल्ली । मोदी सरकार देश के हर नागरिक को प्रत्येक महीने आमदनी के तौर पर एक निश्चित रकम देने की तैयारी में है। इस स्कीम का फायदा अमीर-गरीब सभी को होगा। यानी कि आपको कहीं जाना नहीं पड़ेगा और सरकार आपको एक बंधी हुई सैलरी हर महीने देगी। क्या है वो स्कीम बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम नाम की एक नई योजना लाने पर विचार कर रही है। इसका मतलब है कि सरकार देश के हर नागरिक को घर बैठे ही एक निश्चित रकम देगी। चाहे वो व्यक्ति काम करता हो या नहीं। सूत्रों की मानें तो आर्थिक सर्वे और आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है। प्रस्ताव है तैयार- लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गायस्टैडिंग ने इस प्रस्तााव को तैयार किया है। उनका दावा है कि मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और बहुत जल्द सभी देशवासियों को इसका लाभ मिल सकेगा। प्रोफेसर गाय ने यह भी संकेत दिया कि सरकार इसे फेज वाइज लागू करेगी। आपको बताते चलें कि प्रोफेसर गाय पूरी दुनिया में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की वकालत कर रहे हैं। प्रति महीना 500 रुपये मिलेंगे प्रोफेसर गाय के मुताबिक, इस स्कीम को पायलट प्रोजेक्टक के त...

अदाकार ओम पुरी को अलविदा......

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 66 साल की उम्र में मुंबई में अपने ही घर पर हुआ इंतकाल, देश-दुनिया में मातम का माहौल - एक $फर्द न तो एक घराने की मौत है, अहले हुनर की मौत ज़माने की मौत है। जी हां मशहूर और मारूफ अदाकर जनाब ओम पुरी का अलसुबह उनके आशियाने पर इंत$काल हो  गया। वे 66 साल के थे। देश के चौथे सबसे अहम अवामी $िखताब पद्मश्री से उनको नवाज़ा गया था। इस खबर से पूरे वालीवुड़ और हॉलीवुड में मातम पसर गया है।  असाधारण अभिनेता- साधारण शक्ल-सूरत वाले असाधारण अभिनेता ने न सिर्फ बहुत-सी पुरस्कार-विजेता हिन्दी फिल्मों को अपने अभिनय से सजाया, बल्कि अनेक विदेशी फिल्मों में भी अपने काम का लोहा मनवाया. वर्ष 1976 में विजय तेंदुलकर के नाटक घासीराम कोतवाल पर इसी नाम से बनी मराठी फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले ओम पुरी 80 के दशक में अर्धसत्य, आक्रोश, पार जैसी कला फिल्मों में काम करने के बाद दुनिया की नजऱों में आए। फिर अपने जीवंत अभिनय से धीरे-धीरे वह मुख्यधारा की फिल्मों में भी छाने लगे, और उन्होंने जाने भी दो यारों और माचिस जैसी फिल्मों भी अदाकारी के जौहर दिखाए। कॉमेडी के लिए कभी जोकर नहीं बने ओम पुर...

हाथियों ने ढहाए 25 मकान, सांसत में पड़ी लोगों की जान..!

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-प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में इन दिनों 40 हाथियों के एक दल ने हड़कंप मचा रखा है। इसने पूरे इलाके में 25 घर ढहाए हैं। सैकड़ों एकड़ की फसल भी नष्ट कर दिया है। इंसानों के साथ बढ़ते संघर्ष के कारण हाथी और भी हिंसक हो चले हैं। तो वहीं इलाके में आतंक का माहौल व्याप्त है। सूरजपुर।  क्या है पूरा मामला-  मिली जानकारी के अनुसार 40 हाथियों के दल से भटके दो हाथियों की मौत के बाद दल में बचे 38 हाथियों में से एक बूढ़े हाथी ने दल से अलग होकर मंगलवार की रात ग्राम बंशीपुर व करौंधा में जमकर उत्पात मचाया। उसने जहां सात  घर तोडा वहीं करीब दस एकड़ में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के बंशीपुर, सोनगरा इलाके में 38 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। हाथियों द्वारा आए दिन जहां लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है वहीं घर तोडऩे के अलावा फसलों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।  एक बूढ़ा हाथी ग्राम सोनगरा होते हुये करौंधा व बंशीपुर में घुस आया। ग्राम करौंधा में उसने जहां एक ग्रामीण के घर को तोड़ दिया वहीं बंशीपुर में छ: घरों को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा खलिहान व घर...

Front and Last and Page no-4 of Hamari Sarkar of 5th Januaury 17

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पुलिस ने छुड़ाए 23 बंधक बनाए गए मज़दूर

3 सौ श्रमिकों के फंसे होने की आशा बस्तर। जिले की पुलिस को तमिलनाडु में बंधुआ मजदूरी कर रहे 23 मजदूरों को रिहा कराने में सफलता मिली है। इन मजदूरों को एक स्थानीय दलाल ज्यादा मजदूरी के लालच में ईंटभ_े पर मजदूरी कराने ले गया था। लेकिन इन मजदूरों को वहां 2 महीने से बंधक बना लिया गया था। आरोप है कि जब ये मज़दूर वापस घर जाने की बात ठेकेदार से करते थे तो ठेकेदार और उनके कुछ लोग इन्हें प्रताडि़त करते थे। किसी तरह मजदूरों ने बंधक बनाए जाने की सूचना जगदलपुर पुलिस तक पहुंचा दी।  जिसके बाद बस्तर पुलिस ने तमिलनाडु जाकर इन 23 मजदूरों को ठेकेदार के चंगुल से मुक्त करा लिया। इनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं, हालांकि ठेकेदार मौके से फऱार होने में कामयाब हो गया। और कितने फंसे हुए हैं- इन मजदूरों का कहना है की अभी भी बस्तर के 200 से 300 मजदूर तमिलनाडुके कई इलाकों में ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर बंधुआ मजदूर बनकर काम कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने ठेकेदार और स्थानीय दलालों के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। -

महिला कमांडोज के काम को सलाम

- न मोटी तनख़्वाह न अत्याधुनिक असलहे और न ही गरम कोट,मगर कड़ी ठंड में दुर्ग की ये महिला कमांडोज समाज को स्वच्छ बनाने गई हैं जुट। तमाम समूहों की महिलाएं जहां एक साथ लाठी लिए दिख जाएं। अपराधियों को पकडऩे पर पहुंचाती हैं थाने। इसकी सीटी सुनकर गुंडे और बदमाश हो जाते हैं फरार....। अपराध और अपराधियों पर कसती जा रही हैं ये अपना शिकंजा । जो अपराध रोकने के लिए पहरे पर जाती हंै हर रोज....वही हैं दुर्ग की महिला कमांडोज। यहां नहीं दिखाई देता है कोई तामझाम.....इनके जज्बे को हमारा भी सलाम...! 75 फीसदी तक कम हुए हैं इलाके में अपराध, दूसरे समूह भी ले रहे प्रेरणा दुर्ग/ रायपुर। कैसे करती हैं ये अपना काम-  दुर्ग जिले में महिलाएं टीम बनाकर रात के समय गश्त कर रही है और कई अपराधों को रोकने में इन्होंने सफलता हांसिल की है। सबसे खास बात ये है कि इनसे प्रेरणा लेकर अब अन्य महिला समूह भी सामने आ रहे हैं और इनका भी उद्देश्य यही है कि वे किसी भी तरह समाज को दूषित होने से बचा सकें। सीटी सुनते ही भागते हैं गुंडे- बदमाश दुर्ग की इन महिला कमाण्डों को देख अच्छे अच्छों की घिघी बंध जाएगी।  इनकी सीटी आवाज सुनकर...

1 रुपए के नोट को छापने में आता है डेढ़ रुपए का खर्च

नई दिल्ली। आपने एक  रुपए  का नोट तो देखा ही होगा, भले ही वह अब बहुत कम देखने को मिलता हो, पर हम आपको इस एक  रुपए  के नोट से जुड़ा एक ऐसा तथ्य बताने जा रहें हैं, जिसके बारे में आप शायद नहीं जानते होंगे। जी हां, यह एक ऐसा तथ्य है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं और यह तथ्य है एक  रुपए  के नोट की छपाई में आने वाला खर्च। असल में बहुत कम लोग ये जानते हैं कि एक  रुपए  के नोट को छापने में डेढ़  रुपए  का खर्च आता है। यह जानकारी सरकार की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दी गई है और इसी के साथ में सरकार ने यह भी कहा है कि सरकार की ओर से पिछले दो सालों में एक  रुपए  के 16 करोड़ नोट जारी किए गए हैं। सरकार ने अपनी ओर से दी गई जानकारी में यह भी बताया कि पिछले दो दशकों से एक  रुपए  के नोट नहीं छापे जा रहें हैं, क्योंकि एक  रुपए  के नोट को छापने में उसकी कीमत से ज्यादा खर्च आ रहा था। सरकार के अनुसार एक  रुपए  का नोट छापने में उसको 1 रुपया 48 पैसे का खर्च आ रहा था, जिस कारण ही इसकी छपाई बंद कर दी गई...

ऐसी चट्टान जिससे आती है ढोलक की तरह आवाज..

छत्तीसगढ़ के पत्थरों में छिपा अद्भुत रहस्य जिसकी आज चर्चा है- . !- अम्बिकापुर। भैयाथान विकासखण्ड में इस पत्थर के चर्चे तो काफी है, लेकिन यहाँ और जिले में भी यह अपनी पहचान बना चुका है। इस पत्थर का रहस्य आज तक कोई नही जान पाया है।  लेकिन अब तक यह अबूझ ही साबित हुआ है। क्षेत्र के सिवारी गांव के जंगल में स्थित यह पत्थर करीब 10 फीट ऊंचा व 2मीटर की चौड़ाई लिए हुए है। यहां के ग्रामीणों ने इस पत्थर पर चढ़ के हिलाते है।तो दूर दूर तक ढोलक की तरह आवाज आती है।  चैत राम नवमी में वहा जा के रामायण भी गाया जाता है।और जब पत्थर को हिलाते हैं।तो मधुर ध्वनि निकलती है। यहां पहुचने के लिए जंगल चढऩा पड़ता है। ग्रामीणों ने बकायदा यहां पर पूजा अर्चना भी करते है। पत्थर के कारण इस जंगल का नाम झण्डाघुटरी से प्रचलित हो गया है। बताया जा रहा है कि ढोलक की तरह आवाज आने के कारण ही गांव के बुजुर्गों ने इसका नाम हदगुडिय़ा रख दिया। तब से लेकर आज तक यह इसी नाम से प्रसिद्ध है। सूरजपुर जिले का यह पहला पत्थर है। यह प्रचलित हो चला है। वही  इस पत्थर का रहस्य जानने कोई भी शोधकर्ता नहीं पहुंचा है और न ही जिला प्रशा...

अनहोनी कप्तानी छोड़े महेंद्र सिंह धोनी

- भारतीय क्रिकेट को दुनिया का सिरमौर बनाने वाले दुनिया के सफलतम कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी ने बुधवार को एकदिवसीय और टी-20 टीमों की कप्तानी से भी हटने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट के धोनी युग का अंत हो गया लेकिन धोनी अभी खेलना नहीं छोड़ेंगे। एक ऐसे देश में जहां संन्यास लिया नहीं जबरन लिवाया जाता रहा है, धोनी ने अपने चरम पर रहते कप्तानी से हटने का फैसला किया और नई मिसाल पेश की। तो उनके इस फैसले पर उनकी पत्नी साक्षी सिंह धोनी ने उनकी ट्वीटर पर ये कहते हुए पीठ थपथपाई कि कोई भी ऐसा पर्वत नहीं है जो तुम्हें उस पर चढऩे(बड़ी-बड़ी उपलब्धियों) से रोक सके. तुम पर गर्व है!   स्वत: इस्तीफा देकर कायम की एक मिसाल, साक्षी ने थपथपाई पीठ मुंबई । कहे जाते थे कैप्टन कूल- क्रिकेट इतिहास में जब भी सफल कप्तानों का जिक्र होगा तो उसमें भारत के महेंद्र सिंह धोनी का नाम बेशक आएगा। धोनी का नाम भारत के ही नहीं विश्व के सफलतम कप्तानों की सूची में आता है। धोनी का यह फैसला हैरानी भरा रहा जिससे पूरा क्रिकेट  जगत सकते में हैं। धोनी से इस्तीफे की उम्मीद किसी को नहीं थी। मैदान पर कैप्टन ...

Front and Last page of Hamari Sarkar of 4th Januaury 17

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सियासत और सांसत

सियासत किस तरह दो$गली हो चली है। इसको अगर देखना है तो आप बस्तर चले जाइए। जहां आदिवासियों की जिंदगी नरक बन चुकी है। कहने को तो इनको राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहा जाता है, मगर उन्हीं को जब नक्सली पुलिस के साथ मु$खबिरी का झूठा आरोप लगाकर बकरे की तरह काट कर चले जाते हैं। तो इन गरीबों की सुनने वाला दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई देता। जैसे ही हमारे सुरक्षा बलों के जवान किसी मुठभेड़ में दस-बीस नक्सलियों को मार गिराते हैं। तो उसकी धमक राजधानी में साफ-साफ सुनाई देती है। थोक में तथाकथित साहित्यकार और बुध्दिजीवी, मानवाधिकार वादी झोला लटकाए,इंकलाब जिंदाबाद करने लगते हैं। इनसे कोई ये नहीं पूछता कि क्या वो निर्दोष आदिवासी आदमीं नहीं था? उसका दोष क्या था? क्यों की गई उसकी सरेआम हत्या? शासन-प्रशासन के मंत्री और नेता दिल्ली जाकर आदिवासी राज्य होने का रोना केंद्र सरकार के सामने रोते हैं। फिर योजनाओं के नाम पर मिलने वाली लंबी रकम को खजाने में ढोते हैं। उसके बाद फिर इसी नदी में जमकर अपने चहेते ठेकेदारों के साथ मिलकर लगाते गोते हैं। असल आदमी तक उसका ह$क नहीं पहुंच पाता। वो पहले भी अभावों में था, आज भी अभावों ...