वफादार चौकीदार से कुछ सवाल


 सीधा सा सवाल है प्रधानमंत्री से कि कहां है वो देश का वाफादार चौकीदार जिसका सीना 56 इंच का बताया जा रहा था? कहां हैं उनके दावों का नतीजा जो उन्होंने चुनावों में देश की जनता के साथ किए थे?
मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के अलावा केंद्रीय कर्मचारियों को उपकृत करने वाले प्रधानमंत्री क्या ये देश को बताएंगे कि आखिर किसानों को क्या मिला? उस कारीगर को क्या मिला जो बस्तर के सुदूरआंचल में अपने हथकरघे पर बैठकर कोसा सिल्क की साडिय़ां तो बनाता है मगर उससे उसके परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया है। उसकी कमाई शहरों में बैठा दलाल खा जाता है, क्या मिला उसको?

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आर.पी. सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में देश की जनता से एक बात कही थी, कि हमें 60 महीने के लिए चौकीदार रख लो। हम देश की सेवा पूरी निष्ठा से करेंगे। देश की ढाई अरब जनता ने अपना आदेश दिया और आज वे देश के प्रधानमंत्री बन गए। अब उनकी चौकीदारी की बात आती है, तो आए दिन पाकिस्तान से आतंकवादी देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों पर हमले करते हैं। इस्लामाबाद के पाश इलाकों में बैठे उनके आ$का हमारे देश  की जनता को धमकाते हैं। नक्सली गरीब और निर्दोष आदिवासियों की हत्याएं कर रहे हैं। गरीबों के बच्चे अन्न के अभाव में मर रहे हैं। पोषाहार और अमृत दूध के नाम पर बच्चों को जहर पिलाया जा रहा है। देश के छत्तीसगढ़ राज्य में आलम ये है बस्तर के किसी भी आंगनबाड़ी में बच्चों को सरकारी दूध दिखाने भर की देरी है।  आंगनबांड़ी केंद्र खाली होते देर नहीं लगेगी। लोग वहां से बिना देरी किए निकल लेंगे।
सड़कों और भवनों की जो हालत है उसमें कोई सुधार नहीं आया। कालेधन का मुद्दा आज तक फाइलों में फडफ़ड़ा रहा है। बच्चों को शिक्षा के नाम पर जो बिहार में परोसा जा रहा है उसको पूरा देश जानता है। देश गोया डिग्रियों की दूकान बनकर रह गई है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस वालों तक को सरेआम गोलियां मार कर रसूखदार अपराधी आराम से घूम रहे हैं।
ऐसे में सीधा सा सवाल है प्रधानमंत्री से कि कहां है वो देश का वाफादार चौकीदार जिसका सीना 56 इंच का बताया जा रहा था? कहां हैं उनके दावों का नतीजा जो उन्होंने चुनावों में देश की जनता के साथ किए थे?
मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के अलावा केंद्रीय कर्मचारियों को उपकृत करने वाले प्रधानमंत्री क्या ये देश को बताएंगे कि आखिर किसानों को क्या मिला? उस कारीगर को क्या मिला जो बस्तर के सुदूरआंचल में अपने हथकरघे पर बैठकर कोसा सिल्क की साडिय़ां तो बनाता है मगर उससे उसके परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया है। उसकी कमाई शहरों में बैठा दलाल खा जाता है, क्या मिला उसको?
अच्छे दिन लाने का सपना दिखाकर अपना और अपने नेताओं और मंत्रियों की किस्मत चमकाने का काम तो बखूबी कर लिया गया। देश के मजदूर- गरीब और किसानों को सीधे-सीधे हाशिए पर डाल दिया गया। क्या देश के विद्वान प्रधानमंत्री देश की ढाई अरब जनता को  बताएंगे कि देश में वो कौन सा दरवान है जो अब तक विदेशों की यात्रा पर एक हजार करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च कर चुका है? ऐसे और कितने दरवान हैं इस देश में?
न खाऊंगा और न खाने दूंगा का नारा कहां बेचारा बना बैठा है? देश में दलाल कमाकर लाल हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में अभी हाल ही में भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराज का टमाटर खरीदने वाला कोई नहीं था। प्याज को तो मध्य प्रदेश सरकार ने खरीदा जरूर मगर वो कूलरों की हवा खाते-खाते सड़ गई। इधर छत्तीसगढ़ में टमाटर के दाम सौ रुपए से ऊपर तक चले गए। कुछ दिनों पहले यही हाल दाल का हुआ था। जब दाल ढाई सौ रुपए किलोग्राम की दर से बिकी थी।
प्रधानमंत्री या फिर उनके कार्यालय के द्वारा देश की ढाई अरब जनता से एक बार भी पूछा गया कि आपको क्या त$कलीफ है? बाजारों में बिकने वाली चीजों के दामों पर दलालों का कब्जा है। दाम मनमाने ढंग से बढ़ाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, सड़क, बिजली, पानी जैसी समस्याएं पूरे देश में सिर उठाए खड़ी हैं।
चीन और पाक अपनी-अपनी सेनाओं को मजबूत करने में लगे हैं, तो वहीं हमारी वायुसेना की जरूरतों को नज़रंदाज किया जा रहा है। उनको बेवजह लटकाया जा रहा है। राफेल का सौदा हो या फिर तेजस का अत्याधुनिकीकरण करना और उसका उत्पादन बढ़ाना। सैन्य उत्पादों के लिए लॉकहीड मार्टिन ने टाटा के साथ और फ्रांस की द साल्ट एविएशन ने अंबानी के साथ करार भी किया तो उनके संयंत्र कहां लगेंगे किसी को भी पता नहीं है। देश में शिक्षित बेरोजगार युवाओं की कतार लगातार लंबी होती जा रही है। इसको देखने वाला दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई देता है। ऐसे में समझ में नहीं आता कि इस चौकीदार का देश क्या करे?
एक बात तो तय है कि अगर समस्याओं को इसी तरह दूध पिलाया जाता रहा तो एक बात तो तय है कि देश की जनता इनको आने वाले सालों में सबक जरूर सिखाएगी। इसके बाद इनको अपना अस्तित्व ठीक उसी तरह बचाना मुश्किल हो जाएगा जैसे कांग्रेस के साथ हो रहा है।

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