काम हो न हो मेहनत पूरी

कटाक्ष-

निखट्टू
हर बार जंगल में शेर राजा हुआ करता था, और सभी जानवरों का शिकार भी करता था, ये बात एक बंदर को नागवार गुजरी। उसने कहा कि जंगल में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सरकार बननी चाहिए। सारे जानवरों ने उसकी हिमायत की। इसके बाद शेर को जब इस बात का पता चला कि आपको तो एक बंदर ने चुनाव लडऩे की चुनौती दी है। तो उसने भी इसको स्वीकार कर लिया। चुनाव हुआ और शेर चुनाव हार गया। बंदर की बतौर जंगल के राजा के ताजपोशी हुई। अब बंदर तो आखिर बंदर ही ठहरा। मारे खुशी के फूले नहीं समा रहे थे बंदर मामा।  जहां चाहे वहीं उछल-कूद मचा रहे थे बिना फुल स्टॉप और कॉमा।
शेर को एक दिन गुस्सा आया उसने बकरी के एक बच्चे का अपहरण कर लिया। उसको घने जंगल में ले जाकर डाल दिया। बच्चा मिमियाता रहा और शेर वहीं जमकर बैठ गया। बकरी को जब पता चला तो वो भागी-भागी बंदर के पास गई और गुहार लगाया कि हे महाराज... शेर ने हमारे किड का किडनैप कर लिया है... आप उसको छुड़ाइए। बंदर ने कहा अवश्य ... हम राजा हैं तुम्हारे बच्चे को छुड़ाना हमारा कर्तव्य है। इसके बाद वहां से बंदर पेड़ दर पेड़ छलांग लगाता उस जगह पहुंचा जहां शेर बकरी के बच्चे को लेकर बैठा हुआ था। इसके बाद पेड़ों की डालों से लेकर ऊपर तक गुलाटियां मारना शुरू किया। पौन घंटे तक गुलाटियां मारने के बाद जब पसीना पोंछने लगा तो बकरी मिमिया कर बोली हुजूर... मेरा बच्चा... काफी देर से भूखा है। उसका गला सूख रहा है। सुनते ही बंदर फिर इस डाल से उस डाल और उस डाल से इस डाल पर गुलाटियां मारने लगा। फिर जैसे ही पसीने-पसीने होकर रुका। बकरी फिर मिमियाई हुजूर मेरा बच्चा...। इस पर बंदर ने कहा देखो तुम्हारा बच्चा छूटेगा या नहीं ये मैं नहीं कह सकता मगर मैं मेहनत तो पूरी कर रहा हूं न? अब बात निकली है तो फिर दूर तलक जाएगी। आप इसका अर्थ लगाइए और मैं चला घर.... कल फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए जय...जय।

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