गुम बच्चों पर गुमनाम कार्रवाई



काहे का बाल संरक्षण, इनको तो अब बख़्श दो हुज़ूरबच्चे हो रहे गोल और अधिकारियों के बड़े-बड़े बोल
 सरकारी आंकड़ों में गुमशुदा बच्चों की तादाद 3545 और बरामद बच्चों की संख्या 3095 बताई गई है। तो वहीं गुमशुदा लोगों की संख्या 3597 और बरामद लोगों की संख्या 4034 बताई गई है। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि आखिर 437 लोग कहां से आए? और कौन थे। बाल संरक्षण आयोग के विद्वान लोग झलियामारी में 11 आदिवासी छात्राओं से हुए अनाचार, कांकेर के हॉस्टल में नाबालिग से दुष्कर्म और दुर्ग में फेल कर देने के नाम पर तो बीजापुर में बैडङ्क्षमटन सीखने गई छात्राओं से हुए अनाचार पर कुछ क्यों नहीं करते? इनकी जुबान को लकवा क्यों मार जाता है? राज्य में बच्चे हो रहे हैं गोल और अधिकारी बोल रहे हैं बड़े-बड़े बोल? अब तो जनता यही कहेगी कि काहे का बाल संरक्षण, हमको तो बख़्श दो हुजूर...!

रायपुर।  जिले से साल 2010 से लेकर 6 फरवरी 2015 तक 2358 बच्चे तथा 3329 लड़कियां तथा महिलाएं लापता हुई हैं। पिछले पांच सालों में राज्य से जितने बच्चे लापता हुए हैं उनमें सबसे ज्यादा रायपुर से 16. 7 फीसदी गायब हुये हैं ।
राजधानी रायपुर के बाद लापता बच्चे, लड़कियां तथा महिलायों की संख्या न्यायधानी बिलासपुर में दूसरे नंबर पर है।  बिलासपुर जिले से पिछले पांच सालों में 1446 बच्चे तथा 1498 लड़कियां तथा महिलायें गायब हुई हैं।  राज्य से कुल जितने बच्चे पिछले पांच सालों में लापता हुयें हैं उनमें बिलासपुर जिले से 10. 2 फीसदी तथा लड़कियां तथा महिलायें 7.6 फीसदी लापता हुई हैं। सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में कुल 14,118 बच्चे तथा 19,670 लड़कियां तथा महिलाएं लापता बताई जाती हैं।

सबसे हैरत की बात है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिलों में बच्चों तथा लड़कियों के लापता होने की संख्या तथा प्रतिशत रायपुर एवं बिलासपुर की बनिस्बत काफी कम है।
कहां से कितने बच्चे हुए लापता-
सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ के जशपुर से पिछले पांच सालों में 533 बच्चे, जगदलपुर से 365, दंतेवाड़ा से 82, कांकेर से 241, कोण्डागांव से 99, बीजापुर से 59, नारायणपुर से 39 तथा सुकमा से 38 बच्चों के लापता होने की खबर है।
कहां से कितने फीसदी हुए नदारद-
यदि इन आकड़ों को छत्तीसगढ़ से कुल लापता बच्चों के प्रतिशत के रूप में देखा जाये तो जशपुर से 3. 7 फीसदी, जगदलपुर से 2.5 फीसदी, दंतेवाड़ा से 0.5 फीसदी, कांकेर से 1. 7 फीसदी, कोण्डागांव से 0. 7 फीसदी, बीजापुर से 0. 4 फीसदी, नारायणपुर से 0.2 फीसदी तथा सुकमा से 0. 2 फीसदी बच्चों के लापता होने की खबर है।
कहां से कितनी लड़कियां और महिलाएं-
जहां तक लड़कियों तथा महिलाओं के लापता होने की संख्या है जशपुर से 318, जगदलपुर से 477, दंतेवाड़ा से 133, कांकेर से 506, कोण्डागांव से 187, बीजापुर से 53, नारायणपुर से 43 तथा सुकमा से 12 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं सुधरी सरकार-
इसी बात को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार समेत पूरे देश की सरकारों को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। इसके बावजूद भी ये सरकारें सुधरने से रहीं। न्यायालय की संवेदनशीलता को पुलिस प्रशासन दरकिनार करता प्रतीत होता है, वरना क्या यह संभव है कि निरंतर चेतावनियों के बाद भी लापता बच्चों के आंकड़ों में बढ़ोतरी होती जा रही है।
बॉक्स-
सरकारी वेबसाइट पर भी हो रहा मजाक
मिसिंग चिल्ड्रेन छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर भी आंकड़ों के नाम पर सरकारी मजाक जारी है। यहां गायब बच्चों की संख्या-3545 और गुमशुदा लोगों की तादाद 3597 बताई गई है। तो वहीं बरामद किए गए बच्चों की संख्या 3095 तो वहीं बरामद किए गए लोगों की तादाद 4034 बताई जा रही है। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि आखिर वो 437 लोग कौन हैं जिनको गुमशुदा बताकर बरामद कर लिया गया?
क्या कहती हैं अध्यक्षा-
 बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षा शताब्दी सुबोध पाण्डेय ने बताया कि ये 437 लोग दूसरे राज्यों के लोग हैं जो हमारे राज्य में आ जाते हैं और हमारे पुलिस बल के लोग बरामद कर लेते हैं। तो वहीं छत्तीसगढ़ के कितने बच्चे दीगर राज्यों से बरामद हुए इस बात पर कन्नी काट गईं। तो राज्य में चल रही एजेंसियों के संदर्भ में पूछने पर उन्होंने डीजीपी के ओएसडी जीएन तिवारी से बात करने की नसीहत देकर पल्ला झाड़ लिया।
महानगरों में राज्य की बच्चियों का होता है शोषण-
ऐसी तमाम खबरें आई हैं जब जशपुर की तमाम आदिवासी बालिकाएं नई दिल्ली और हरियाणा जैसे बड़े शहरों से बरामद हुईं हैं। इसके बाद की पूछताछ में उन्होंने आरोप लगाया कि दलाल ने उनको सुहाने सपने दिखाकर उनकी जिंदगी ही चौपट कर डाली। उनको मोटी तन्ख्वाह का लालच देकर महानगरों में ले गया जहां उनको कोठों तक पर बेच दिया जाता है।

इन मामलों पर क्यों नहीं बोलता बाल संरक्षण आयोग-
1 - छत्तीसगढ़ में कांकेर के एक हॉस्टल में 11 नाबालिग छात्राओं से बलात्कार का मामला सामने आया था। हॉस्टल के टीचर और चौकीदार पर बलात्कार करने का आरोप था। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक के झलियामारी गांव के एक कन्या आश्रम में 11 आदिवासी बच्चियों के साथ दुष्कर्म को अंजाम दिया जा रहा था।
2 -चिरमिरी,बैकुंठपुर के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल छात्रावास में 9 साल की छात्रा से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। 
3 -  बस्तर के तीन मेधावी बच्चों से झाड़ू-पोछा कराने के मामले में जवाहर उत्कर्ष योजना के नाम पर बड़े खेल का खुलासा हुआ। देवेंद्रनगर के जिस वेदांता इंटरनेशनल स्कूल को इस योजना में शामिल किया गया था, उसके बाद न तो खुद का भवन है और न ही हॉस्टल। यही नहीं, आसपास के तमाम लोगों का दावा है कि वहां स्कूल नहीं लगता बल्कि कोचिंग सेंटर है। बच्चों को स्कूल में पढ़ाने की बजाय आरोपी घर में रखकर उनसे काम करवा रहा था।
4- बालोद जिले के आमाडूला छात्रावास की बालिकाओं के साथ भी सामूहिक दुराचार का मामला सामने आया था।  इस प्रकरण में आश्रम की अधीक्षिका की संलिप्तता थी।

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