डाकपाल पर क्यों नहीं आती जांच की आंच





 भ्रष्टअफसरशाही और निकृष्ट नेतागिरी के चलते मनरेगा के मस्टररोल  में झोल देकर सरकारी पैसे गोल किए जा रहे हैं। इस मामले का पूरा खेल ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, सचिव, रोजगार सहायक एवं भुगतान करने वाले डाकपाल (पोस्ट मास्टर) मिलकर खेल रहे हैं। मजेदार बात तो ये कि पता नहीं कितनी जांच कमेटियां बनाई गईं, मगर एक भी जांच कमेटी के जांच की आंच डाकपाल तक नहीं पहुंचती। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि आखिर क्यों नहीं पहुंचती है डाकपाल तक जांच की आंच?

मुंगेली जिले में फर्जी भुगतान का आखिर कौन है जिम्मेदार...
00    मनरेगा से जुड़े योजनाओं में डाकपाल की भूमिका संदिग्ध
00    विभागीय निरंकुशता के चलते नहीं होती कार्यवाही।

       
मुंगेली।
क्या है पूरा मामला-
 पूरे देश में आए दिन मनरेगा में फर्जी मस्टर रोल से आहरण होने की शिकायत मिल रही है, फर्जी मस्टर रोल भरना अर्थात ऐसे मजदूरों का नाम मस्टर रोल में लिखना जिसने काम ही न किया हों, ऐेसे में भुगतान किसे किया गया होगा? यह सोचने की बात है। लेकिन भुगतान तो हुआ है इसका मतलब कहीं न कहीं गलत तो हुआ है। फिर इसमें दोषी कौन -कौन हंै? क्या उन पर कभी कार्यवाही हुई है? अगर हां तो आज भी ऐसे मामले क्यों सामने आ रहे हैं?
        या ये कहें कि ऐसे मामलों में सिर्फ सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक, संबंधित तकनीकि सहायक या सत्यापनकर्ता एसडीओ ही दोषी हैं या फिर वह डाकपाल जिसने उन मजदूरों के नाम पर राशि वितरण किया है जो कथित तौर पर फर्जी है। प्रदेश स्तर पर भी आए दिन मनरेगा में फर्जीवाड़े की शिकायत सुनना आज आम बात  हो गई है।
जिला मुख्यालय में भी नहीं सुनी जाती गरीबों की शिकायतें-
बात अगर मुंगेली जिले की करें तो यहां फर्जी मस्टर रोल से भुगतान होने संबंधी शिकायतों की झड़ी लगी है। जिला मुख्यालय करही में आए दिन भारी मात्रा में ग्रामीण शिकायत करने पहुंच रहे हैं, लेकिन इन शिकायतों पर सहीं जांच न होने से निश्चित तौर पर उन्हें निराशा का सामना करना पड रहा है। तो वहीं अधिकारी भी ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नहीं दिखाई देते हैं।
कौन हैं दोषी-
मनरेगा से जुडे मामलों में सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक एवं शाखा डाकपाल एक कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं। फर्जी मस्टर रोल भरने के संबंध में सरपंच एवं रोजगार सहायक जितने दोषी हो सकते हैं उतने ही संबंधित तकनीकि सहायक एवं एसडीओ हैं और उतने ही दोषी संबंधित शाखा डाकपाल है। जिन पर भुगतान का पूरा दारोमदार रहता है।

क्यों नहीं होती कार्रवाई-
 ऐसे मामलों में जनपद पंचायत स्तर के अधिकारी एवं कर्मचारी ही शिकायतों की जांच करते हैं, फिर भला अपने ही खिलाफ  जांच करने वाला अधिकारी अपनी ही टीम को कैसे गलत साबित कर सकता है? इन सब मामलों में उस शाखा डाकपाल को किनारे कर दिया जाता है जो ऐसे मामलों में प्रमुख भूमिका निभा रहा होता है।
डाकपाल चाहे तो बंद हो जाएंगे फर्जी भुगतान-
 कुछ जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में राशि का बंटवारा सरपंच, रोजगार सहायक एवं संबंधित डाकपाल आपस में करते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि अगर संबंधित शाखा डाकपाल चाहे तो फर्जी भुगतान जैसे मामलों में कमी आएगी।
इन गांवों में की जाए फर्जी मस्टररोल से भुगतान की जांच-
मुंगेली जनपद पंचायत क्षेत्र में मजदूरों के भुगतान हेतु शाखा डाकपाल की निुयक्ति की गई है इनमें कुछ शाखाओं में ऐसे मामलों का सामने आना आम बात है ये शाखाएं भालापुर, भालूखोंदरा, चकरभाठा, छिंदभोग, चिरहुला, धरमपुरा, देवरी, फंदवानी, फास्टरपुर, गीधा, करही, लालपुर, मनोहरपुर, नवागांव, पुरान, टेढाधौरा हैं। जिनमें मस्टर रोल के आधार पर मजदूरी भुगतान से जुड़े मामलों में अगर प्रशासन एक -एक रुपए का हिसाब ले तो करोड़़ों के फर्जी भुगतान होने की बात सामने आयेगी।
कहां-कहां है गड़बड़ी-
लोरमी के शाखा डाकपाल जिन पर जांच की आंच आनी जरूरी है।
    लोरमी जनपद पंचायत क्षेत्र में भी ऐसी शाखाएं हैं जिनमें प्रमुख रूप से बैगाकापा, बोडतरा, चंदली, दाउकापा, देवरहट, डोंगरिया, डिंडौरी, फुलवारी, घानाघाट, जूनापारा, सुरही, खुडिया, सारधा, सुकली, बांधा, गोडख़ाम्ही एवं चंदली, हैं। ये सभी ऐसी शाखाएं हैं हैं। जिनमें मस्टर रोल के आधार पर मजदूरी भुगतान से जुड़े मामलों में बारिकी से जांच की गई तो करोड़़ों के फर्जी भुगतान होने की बात सामने आयेगी।

संलग्न फोटो - 03
मोहित जाटवर/8964054311
---------------------------------------------------------------------------------------------------------


Comments

Popular posts from this blog

पुनर्मूषको भव

कलियुगी कपूत का असली रंग

बातन हाथी पाइए बातन हाथी पांव