शहडोल में डोलती है रात को छतें



जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर बिजौरी गांव की एक बस्ती भूतों की बस्ती के नाम से प्रसिद्ध है।  ये बस्ती गांव के पास ही प्रदेश सरकार की बैगा हितग्राही विकास योजना के अंतर्गत लगभग 30 लाख रुपए से बसाई गई थी।  गांव के बैगा आदिवासियों को आवास देने 2011-12 में बनी बैगा बस्ती अब खंडहर हो चुकी है।ं यहां रहने वालों का आरोप है कि यहां शाम होते ही छतें हिलने लगती हैं। यहां के निवासी इसको किसी भूत-प्रेत का साया मान बैठे और मकान खाली करके भाग निकले। पिछले 5 सालों से ये मकान खाली पड़े हैं। यही कारण है कि लोग इसको भूत बस्ती कहते हैं।
भूत बस्ती 5 साल से है वीरान, चुप्पी साधे हैं श्रीमान

भय से बस्ती छोड़कर भाग निकले गरीब, भूत-प्रेत का साया होने की फैली अफवाह
शहडोल।
क्या है पूरा मामला-
मध्य प्रदेश के शहडोल में एक बस्ती पिछले पांच सालों से वीरान पड़ी है।  लोगों का कहना है कि यहां भूत का साया मंडराता है और इसी डर से ये लोग अपने घर छोड़ कर चले गए हैं।
इसका कारण है कि बस्ती बनने के बाद यहां आए हितग्राहियों में से एक की मौत ने सब को दहशत में डाल दिया है।  लोगों का कहना है कि रात होते ही यहां घरों के टिन शेड हिलने लगते हैं।
हर रात एक डरावने अनुभव को सहते ये बैगा आदिवासी नए घरों से मात्र 3-4 दिनों में ही भाग निकले।  अब 5 सालों से ये बस्ती वीरान है।  लोगों में एक अजीब दहशत है।
अधिकारियों को वापस कर दी चाबी-
इस दहशत का ऐसा असर है कि लाखों की लागत से बसी इस सर्व सुविधायुक्त बैगा बस्ती को सभी लोग छोड़ चुके हैं।  बैगा आदिवासी अंधविश्वास में जहां आवास होने के बाद भी जर्जर झोपडिय़ों और मकानों में रहने को मजबूर हैं तो वहीं, विभाग के अधिकारियों ने भी उन्हें आवासों की चाबी देकर अपनी जवाबदारी समाप्त कर दी है।



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