वादी के अलगाववादी

खटर-पटर-

निखट्टू-
संतों..... जब रामेश्वरम में भगवान श्रीराम चंद्र जी रामेश्वरम सेतु का निर्माण करवा रहे थे। तो नल-नील के स्पर्श किए पत्थरों को अंगद, हनुमान जैसे वीर एक सलीके से रख रहे थे। भालू और बंदर छोटे बड़े पत्थरों के टुकड़ों को अपनी-अपनी सामथ्र्य के अनुसार उठा-उठाकर रखते जा रहे थे। इन सारे लोगों के बीच एक गिलहरी समुद्र की बालू में लोटती और फिर दौड़कर आती जहां पत्थरों के बीच में जगह होती उसमें बालू झाड़ कर दोबारा किनारे भाग जाती। उसका यही क्रम चलता रहा। वहां मौजूद कई बलवान योध्दा उसके इस कार्य को देखकर उसकी खिल्ली उड़ाते रहे। आखिरकार एक बंदर ने पूछ ही लिया कि गिलहरी बहन तुम ये बार-बार तीन ग्राम बालू अपने बालों में भर कर जो इन मोटी दरारों में भर रही हो। हमें तो लगता है कि बेकार प्रयास कर रही हो। इससे तो तुम दिन भर में एकाध ही दरार भर पाओगी।  तुम्हारा ये प्रयास हमारे किस काम का। गिलहरी ने हंसते हुए कहा- भैया हमें अपनी ताकत का पूरा पता है कि मैं कितनी सामथ्र्य रखती हूं। जो कर भी रही हूं वो आप लोगों के सामने है। मैं पूरी ईमानदारी से मानती हूं कि मेरे इस 3 ग्राम बालू से इतने बड़े बांध का कुछ भी नहीं होने वाला। मगर मेरे भाई जब इस सेतु का इतिहास लिखा जाएगा तो मेरा नाम दरार पैदा करने वालों में नहीं, दरार पाटने वालों में लिखा जाएगा। सुनकर वो बंदर मौन हो गया और चुपचाप वहां से उस गिलहरी को प्रणाम करके खिसक लिया। लगातार अत्यधिक श्रम करने से उस गिलहरी की मौत हो गई। जब सेतु बनकर तैयार हो गया तो भगवान ने सारे जीवों की गणना शुरू की। तो उनको गिलहरी नहीं मिली। भगवान बेहद दु:खी हो गए और कहा कि जब तक वो हमारी अनन्य भक्त नहीं आ जाती हम इस पुल को पार नहीं करेंगे। सारे बंदर और भालू उस गिलहरी की खोज में लग गए। बड़ी देर बाद एक बंदर उसकी लाश को भगवान राम के पास लाया। भगवान ने उसको जिंदा किया और बोले कि हे गिलहरी तुम्हारे इस निष्काम योग से मैं तुम पर बेहद प्रसन्न हूं तुम वर मांगो। गिलहरी ने हंसते हुए कहा प्रभु मैंने आपकी सेवा करते-करते प्राण त्यागा है। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। सुनकर भगवान ने समुद्र के जल से उसके शरीर पर अपनी तीन उंगलियों से ल$कीर खींच दी। इसके साथ ही उसको वरदान दिया कि तुम्हारी ये ईमानदारी हमेशा याद की जाएगी। हमारे देश में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो रार और दरार पाटने की कौन कहे रार और दरारें पैदा करने में खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। ये इन छोटे जीवों से भी सीख नहीं लेते। ऐसे में देश की सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों को अब उपकृत करना तत्काल बंद कर दिया जाए। जो भी दरार पैदा करें उनकी सरकारी सुरक्षा को छीनकर उनके ऊपर तत्काल देशद्रोह की कार्रवाई की जानी चाहिए। क्यों समझ गए न सर.....तो अब हम भी निकल लेते हैं अपने घर...कल फिर आपसे मुलाकात होगी तब तक के लिए जय....जय।
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