राजनांदगांव में दबंगों ने दबाई सरकारी जमीन






 भ्रष्ट अफसरशाही और निकृष्ट हो चली नेतागिरी तथा भू-माफियाओं की तिकड़ी के संरक्षण में कुछ रसूखदार राजनांदगांव में अब सरकारी जमीन भी हथियाने का खेल -खेलने में लगे हैं। खैरागढ़ सिविल अस्पताल के सामने दंतेश्वरी रोड़ पर इन्हीं दबंगों ने सरकारी और नज़ूल की जमीन पर अवैध मकान तान दिए हैं। तो अब इन अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई करने में प्रशासन के हाथ कांप रहे हैं। अगर यही काम किसी गरीब आदमी ने किया होता तो अब तक न जाने कितनी बार नगर पालिका का बुलडोजर उस पर गरजता इसकी कोई गिनती नहीं रहती। तो वहीं इलाकाई पत्रकार भी घटना की प्रेस विज्ञप्तियां अपने-अपने समाचार पत्रों में भेज कर बहादुर बने फिरते। रसूखदारों के आगे इन सारे लोगों ने आंख कान और नाक मुंह सब बंद कर रखा है। ऐसे में सवाल तो यही है कि क्या ये मु_ी भर रसूखदार कानून पर भी भारी पडऩे लगे हैं?

राजनांदगांव।
क्या है पूरा मामला-
जिले के खैरागढ़ सिविल अस्पताल के सामने दंतेश्वरी रोड पर  दबंगों ने सरकारी जमीन और नजूल की जमीन पर धड़ल्ले से कब्जा जमा लिया है। यहां कुछ लोगों ने तो मकान बना कर किराए पर दे दिया है। तो वहीं कुछ लोग अभी भी अवैध निर्माण में लगे हैं। इस बात को लेकर शासन प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। इसका सबसे अहम कारण है कि इन दबंगों के कुनबे में एक सरकार चिकित्सक भी बताई जाती हैं। जिनका प्रदेश के एक बड़े राजनेता के परिवार से संबंध है।
शासन प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान-
इन दबंगों ने शासन-प्रशासन के अधिकारियों को भी अपने रसूख के चलते दबा रखा है। आलम ये है कि ये लोग भी कुछ बोलने तक को तैयार नहीं हैं। जो भी यहां मौका पाता है धीरे से कब्जा जमाकर एक बिल्डिंग तान देता है। इसके बाद अगर खुद रहा तो रहा नहीं तो उसको किराए पर देकर कहीं अन्यत्र चला जाता है।
हाल में किन-किन लोगों ने हथियाई जमीन-
यहां विनय देवांगन जिस मकान में किराए पर रहते हैं वो किसी वकील का बताया जा रहा है। तो वहीं किशोर सिंह और मालती सिंह एवं सुमन यादव जैसे तमाम अवैध कब्जाधारियों ने यहां पर सरकारी जमीन हथिया रखी है। ऐसे में सवाल तो यही है कि क्या सरकार सिर्फ गरीबों पर ही कार्रवाई करती है?  यही काम अगर किसी गरीब ने किया होता तो अब तक नगर पालिका का बुलडोजर गरज चुका होता और मामला समतल हो जाता। यहां तो इन रसूखदारों पर कार्रवाई करने में अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथ कांप रहे हैं।
अस्पताल की जगह को भी नहीं बख्शा-
इन दबंगों के साहस की दाद देनी पड़ेगी कि इन लोगों ने अस्पताल की भी जमीन को नहीं बख्शा। वहां भी कब्जा जमाकर मकान तान दिया।  यहां इनका दबदबा बढऩे के पीछे कारण ये है कि यहां के लोग सरकारी सेवाओं में हैं। ऐसे में कोई भी इनसे झगड़ा नहीं करना चाहता है। बस इसी बात का फायदा उठाकर ये लोग जब भी मर्जी आती है मकान तान देते हैं।
सरकारी महिला चिकित्सक पर प्राइवेट प्रैक्टिश का आरोप-
नाम नहीं छापने की शर्त पर मोहल्ले के तमाम लोगों ने इस अवैध कब्जा कर बनाई गई क्लीनिक में सरकारी महिला चिकित्सक द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिश किए जाने की भी शिकायतें मिली हैं। ऐसे में सवाल तो यही है कि जब सरकारी सेवा में रहते हुए प्राइवेट चिकित्सा करने का कोई नियम नहीं है। तो फिर ये चिकित्सक बराबर ऐसा कार्य क्यों कर रही हैं?
क्या कहती हैं नगर पालिका अध्यक्ष-
इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष मीरा गुलाब चोपड़ा का कहना है कि सरकारी नियम बन गया है कि ऐसी जमीन पर काबिज लोगों को उसका मालिकाना ह$क दे दिया जाए। इसके लिए हमने सभी को पत्र प्रषित कर दिया है। जल्दी ही सभी को मालिकाना हक प्रदान कर दिया जाएगा।
क्या कहता है नियम-
जानकारों का मानना है कि नजूल जमीन पर कोई भी आम आदमी तब तक कब्जा नहीं कर सकता है। जब तक उसको कलेक्टर फ्री होल्ड न कर दे। इसके बाद ही जिसके नाम पर ये जमीन फ्री होल्ड होगी उसी के नाम पर उसको अलॉट किया जा सकेगा।
कलेक्टर ने नहीं उठाया फोन-
राजनांदगांव के कलेक्टर मुकेश कुमार बंसल से उनके मोबाइल नंबर 9425274165 पर लगातार फोन किया गया, मगर उन्होंने फोन तक रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा। इससे हमारी प्रशासनिक मशीनरी की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है। तो वहीं सवाल तो ये भी उठता है कि जब ये अधिकारी पत्रकारों के फोन रिसीव नहीं करते तो फिर आम जनता के फोन पर कितनी कार्रवाई करते होंगे?
स्थानीय पत्रकारों पर भी आरोप-
स्थानीय निवासियों ने नाम नहीं  छापने की शर्त पर बताया कि यहां के कुछ तथाकथित स्थानीय पत्रकारों ने भी इन भू-माफियाओं को संरक्षण दे रखा है। जब भी जरूरत होती है तो इनको भी रसूखदारों की सेवाएं पहुंचती रहती हैं। इन्हीं की शह पर यहां भू-माफिया इस खेल को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने वाले तथाकथित पत्रकारों ने इस पेशे को कलंक बना डाला है। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा पत्र-पत्रिकाएं राजनांदगांव से निकलती  है, मगर उनकी प्रसार संख्या कितनी है ये भी एक सुलगता सवाल है?

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