कहां गए स्वच्छता अभियान के नौ रत्न






 रायपुर देश का दूसरा सबसे गंदा शहर घोषित हो चुका। शहर में चारों ओर गंदगी पसरी है। शौचालयों के पैसे अधिकारी -कर्मचारी खा गए। ओडीएफ के नाम पर कागजी खानापूरी हो रही है। कोई बकरियां तो कोई अपने गहने और किसी ने राशन बेचकर शौचालए बनवाए, मगर वे प्रधानमंत्री के मन की बात में अपना स्थान नहीं बना पाए। अधूरे शौचालयों के गड्ढे में गिरकर कई बच्चे मर गए। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किसान कर रहे हैं तमाम जतन। तो वहीं आम छत्तीसगढिय़ा खोज रहा है कि आखिर कहां गए रमन के नौरत्न?
लोगों ने बेंचे जमीन और जेवर, खोदकर खुले गड्ढों में गिरकर जा चुकी है 5 बच्चों की जान

रायपुर।
क्या है पूरा मामला-
20 अक्टूबर 2014 सोमवार को महानदी भवन में प्रदेश के मुखिया ने स्वच्छता अभियान के तहत नौरत्नों को मनोनीत किया था। इनमें स्वामी सत्यरूपानंद, तीजनबाई,फुलबासन यादव, डॉ. टीके दाबके,अभिनेता अनुज शर्मा,सबा अंजुम, हरीश केडिया, चंद्रशेखन और बब्रूवाहन सिंह शामिल थे। दो साल बीत जाने के बावजूद भी ये लोग कहीं भी नज़र नहीं आए।
रायपुर दूसरा सबसे गंदा शहर-
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि रायपुर देश का दूसरा सबसे गंदा शहर है। यहां के नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी भले ही अपनी-अपनी सफलता के दावे कर अपनी पीठ ठोंकने में लगे हैं। मगर शहर की हालत बेहद नाजुक हो चली है।
आंकड़ों के दौड़ाए जा रहे घोड़े-
गांवों को ओडीएफ बनाने के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। इनका ह$कीकत से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे तमाम गांवों में आज भी लोग खुले में शौच करने जाते देखे गए हैं।
कैसे-कैसे बनवाए शौचालय-
जिन शौचालयों को लेकर सरकार और उसके अधिकारी -कर्मचारी अपनी पीठ ठोकते हैं उनकी असलियत जानकर आप चौंक जाएंगे। किसी ने अपने गहने बेंचे तो किसी ने खाने का अन्न। किसी ने खेत गिरवीं रखकर शौचालय निर्माण करवाया। अब अधिकारी इसको अपनी सफलता बताकर कागजों में भुना रहे हैं।
11सरपंचों ने दी आत्महत्या की धमकी-
कंकेर जिले स्थित बस्तर क्षेत्र के 11 सरपंचों ने धमकी दी थी कि यदि 1 माह के भीतर स्वच्छ भारत अभियान के तहत कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान नहीं किया गया तो वे आत्महत्या कर लेंगे। सरकारी अधिकारियों की ओर से शौचालय बनाने के टार्गेट को पूरा करने के लिए सरपंचों ने निर्माण सामग्री, नकदी और मजदूरों का इंतजाम इस वादे पर किया कि वो जिला प्रशासन से राशि पारित होने पर सबका भुगतान कर देंगे। बताया जा रहा है कि जब सरपंचों के गांव में जब शौचालय बन गए और उनके गांवों को खुले में शौच से मुक्त गांव घोषित कर दिया गया तो उनके लिए अपने घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
299 शौचालय बनवाए-
 सरपंच महर सिंह उसेंडी ने बताया कि उनके गांव को खुले में शौच से मुक्त ग्राम 7 अप्रैल को घोषित किया गया और 299 शौचालय बनवाए गए।
श्री उसेंडी ने बताया कि मुझे जिले से इस बात की जानकारी मिली थी कि हर घर में शौचालय होना जरूरी है। मुझे यह भी कहा गया कि मैं अभी इंतजाम कर लूं, भुगतान बाद में होगा।
23 लाख का कर्ज-
उन्होंने कहा कि ऐसा आश्वासन मिले के बाद मैंने काम कराया और अभी बीते एक साल में मैं 23 लाख रुपए के कर्ज में डूब चुका हूं।
मैं मजदूरों,सप्लायर्स और पैसे उधार देने वालों से परेशान हो चुका हूं। इस ब्लॉक के हर सरपंच का यही हाल है। क्या हमारे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई और रास्ता है?
अधूरे शौचालयों के गड्ढों में गिरने से 5 बच्चों की मौत-
प्रदेश में अधूरे शौचालयों के खुले गड्ढों में गिरने से 5 बच्चों सहित बड़ी तादाद में मवेशियों की मौत हो चुकी है। ऐसे में सवाल तो यही है कि आखिर ये स्वच्छता अभी और कितनों की जान लेगी?
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