धमाके से हलाकान रवान के किसान




 जिले के खनिज अफसरों, पूंजीपतियों और पंच-सरपंचों की तिकड़ी ने रवान के किसान को हलाकान कर रखा है। यहां नियम कायदे को ताक पर रखकर ताबड़तोड़ विस्फोट किए जा रहे हैं। इसकी वजह से यहां के घरों में दरारें आ गई हैं।  तो वहीं लगातार विस्फोट से उडऩे वाली धूल से 12 सौ एकड़ की फसल चौपट हो गई है। यही कारण है कि ग्रामीण अब उकता कर अपनी खेती-बाड़ी और घर तक पूंजीपतियों को बेचकर यहां से पलायन कर रहे हैं। तो शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कान में तेल डाल कर सोए होने का नाटक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल तो यही है कि क्या ये शासन-प्रशासन रवान के खाली हो जाने के बाद ही जगेगा?

खदानों की धूल से चौपट 12 सौ एकड़ की फसल

बलौदाबाजार।
क्या है पूरा मामला-
जिला मुख्यालय बलौदाबाजार ब्लॉक के गांव रवान, पौसरी, भरसेला, भरसेली के 130 घरों में निवासरत लोगों मौत के साये में जीने के लिए मजबूर हैं। स्थिति ये हैं कि ग्रामीण अब यहां गांव छोडकर पलायन की तैयारी करने लगे हैं। सीमेंट फैक्टरी के लिए सीमेंट बनाने के लिए पत्थर की आवश्यकता होती हैं। दरअसल यहां के पत्थर खदान में किए जा रहे लगातार विस्फोट से यहां के घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। खेत की फसल इसकी धूल से खराब हो रही हैं।
वो भी एक समय था जब यहां हरे-भरे पेड़ पौधे हुआ करते थे। फलों और फूलों से लदे पेड़ों की अधिकता और खुशबूदार हवा की वजह से ही इस गांव का नाम रवान पड़ा था। तो अब लगातार हो रहे धमाकों की वजह से ये अब अपना वजूद खोने लगा है। 
क्यों पड़ा इसका नाम रवान-
एक समय था जब पेड पौधों फूलों से आसपास का क्षेत्र खिले खूबसूरत फूलों की वजह से इस गांव का नाम रवान रखा गया, परन्तु वर्तमान में प्राकृतिक संपदा से भरपूर गांव रवान अपना वजूद खोने लगा है।
ग्राम रवान ,पौसरी से महज दो सौ मीटर दूरी पर पत्थर की खदान है। जहां कम्पनी के कर्मचारी बारूद लगाकर 60 से 70 फीट तक की खुदाई कर दी गई है। भारी मात्रा में मौजूद पत्थरों को तोडने के लिए कम्पनी द्वारा बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा हैं।  बारूद के तेज धमाकों के कारण गांव के अधिकांश घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं।
विस्फोट होते ही गिरने लगते हैं कवेलू-
 आलम ये है कि ब्लॉस्टिंग होते ही कई घरों की कवेलू गिर जाती हैं तथा दीवारों के प्लास्टर उखड जाते हैं।
भूकंप आने जैसा होता है अनुभव-
 इससे लोग अपने ही घरों में खौफ  से जीने को मजबूर हैं। अनेक बार तो जब जमीन से 40 से 50 फ ीट नीचे बारूद लगाया जाता हैं तो जमीन के अंदर इतना भारी कंपन पैदा होता हैं । लगता है मानो भूकंप आ गया है।   कई बार तो ग्रामीण इस कंम्पन से इतने भयभीत हो जाते हैं। कि अपने बच्चों को लेकर घर के बाहर खुले मैदान में आ जाते हैैं। 
माइनिंग इंस्पेक्टर ने किया मुआवजे से इंकार-
जिला प्रशासन तथा माइनिंग विभाग के अधिकारियों से इसकी कई बार शिकायत की जा चुकी थी।  ग्रामीणों ने बताया कि बारूद की  आवाज से खैफनाक जिंन्दगी जीने वाले इन ग्रामीणें ने जनदर्शन में आकर ज्ञापन सौंपा था, परन्तु आज तक इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। माईनिंग इंस्पेक्टर एक दिन गांव आये तथा यह कहकर चले गए कि मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं हैं।  तो वहीं इन खदानों की धूल से 12 सौ एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है।
गांव में बच्चों को नहीं छोड़ते अकेला-
ग्रामीण लोकेश कुमार, पोखन लाल, धरमदास न बताया कि खदानों से उठी हलचल की वजह से गांव हिल जाता हैं। ऐसे में हमेशा मकानों के ढहने का डर सताता रहता है। पक्के मकानों में भी दरारें पड़ गई हैं। सबसे ज्यादा चिंता हमें अपने बच्चो ंंकी लगी रहती हैं। उन्हें घर में अकेला नहीं छोड सकते। किसी भी अनहोनी की आशंका से हर पल कोई न कोई व्यक्ति रहकर छोटे बच्चों की निगरानी करते हैं।
कुछ लोग हो चुके हैं घायल-
कुछ घरों में छत का प्लास्टर गिरने से सोते हुए ग्रामीण भी घायल हो चुके हैं। तब से घर में खेलते व सोते बच्चों की देखभाल में गंभीरता दिखाई है। बच्चों को अकेला छोडकर नहीं जा सकते।
निर्धन हो रहे ग्रामीण-
पत्थर खदानों से घिरे गांव रवान के लोग धीरे-धीरे निर्धन होते जा रहे हैं।  इनकी पीड़ा न तो अधिकारी कर्मचारी सुनते हैं और न ही नेता? तो वहीं पूंजीपतियों की निगाह इनकी जमीन पर रहती है। इसको वही लोग औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं। गरीब अपना घर और खेती बाड़ी बेंचकर यहां से पलायन करने पर मजबूर हैं।

पंचायत की भूमिका पर भी संदेह-
ग्रामीणों को दर- दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर करने में पंचायत की भी अहम भूमिका हैं।  वर्तमान में उक्त पत्थर खदान के मालिक ने शपथ पत्र भी पंचायत को दिया था। जिसमें लिखा गया था कि  भूमि पर उनके द्वारा लगाये गए क्रशर प्लांट की डस्ट से अगर किसी के खेत की फसल खराब होती है तो उनके द्वारा समझौता कर किसानों को मुआवजा भी प्रदान किया जाएगा। परन्तु शपथ पत्र में दी गई किसी भी कंडिका का पालन नहीं किया जा रहा है। 10 फीट खुदाई की जगह वर्तमान में जहां 70 से 80 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। तो पंचायत के जिम्मेदार लोग कान में तेल डालकर सोए पड़े हैं।



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