सुराज की सड़क में भ्रष्टाचार की सुरंग


 राज्य की भ्रष्टअफसरशाही और ठग ठेकेदारों के साथ नेताओं की तिकड़ी ने विकास के नाम पर सरेआम लूट मचा रखी है। इसका नमूना धौरपुर ब्लॉक मुख्यालय को जोडऩे वाली धौरपुर-लुण्ड्रा मार्ग पर देखा जा सकता है। जरा सी तेज बारिश क्या हुई सड़क के नीचे सुरंग खुद गई। अब ये सड़क सुराज की सरकार के विकास की ढोल पीटने वालों की पोल खोल रही है। इस पर वाहनों का आवागमन तो बंद हो गया है, मगर यदि अंधेरे में कोई भी भारी वाहन अगर इसपर से गुरजेगा तो उसका दुर्घटनाग्रस्त होना तय है। कुल मिलाकर ये सड़क किसी बड़े हादसे को न्यौता देती दिखाई दे रही है। तो वहीं जिम्मेदार अनजान बनने का ड्रामा कर रहे हैं। सवाल तो यही है कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? प्रशासन-अधिकारी, नेता या फिर ठेकेदार?
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार
अम्बिकापुर।

धौरपुर ब्लॉक मुख्यालय को जोडऩे वाली मुख्य सड़क तेज बारिश के कारण धंस चुकी है। सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाने के कारण उक्त मार्ग पर आवागमन बंद हो चुका है। गाडिय़ां मुख्य मार्ग से न जाकर ग्रामीण सड़क से लुण्ड्रा एवं धौरपुर के बीच चल रही है।
क्या है पूरा मामला-
गौरतलब है कि धौरपुर-लुण्ड्रा मुख्य मार्ग में मुख्य सड़क इस वर्ष की भारी बारिश के कारण जर्जर हो चुकी है। सड़क के  नीचे की मिट्टी बरसात में बह जाने के कारण सड़क के बीच का हिस्सा बह गया है।  इससे सुराज की सड़क में भ्रष्टाचार की सुरंग बन गई है। इसकी जानकारी लोक निर्माण  विभाग को पूर्व से होने के बाद भी लापरवाही बरती जा रही है और मरम्मत कार्य अभी तक नहीं कराया गया है। सड़क के नीचे की मिट्टी बहने के कारण सड़क के बीचोबीच गड्ढा हो चुका है। इस स्थिति को देखते हुये उस मार्ग से चार चक्का वाहनों को पार करना खतरे से खाली नहीं है। इस परिस्थिति में इस मार्ग से चार पहिया वाहनों का गुजरना पूरी तरह से बंद हो चुका है। विभाग द्वारा सड़क पर कोई बेरिकेट्स भी नहीं लगवाया गया है। रात को कोई भारी वाहन अगर धोखे से इस मार्ग से गुजरता है तो निश्चित ही बड़ा हादसा होना तय  है।
पीडब्ल्यूडी उप अभियंता ने नहीं उठाया फोन-
 इस संबंध मे पीडब्ल्यूडी के उप अभियंता सरिता ठाकुर से दूरभाष पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई, परंतु सम्पर्क नहीं हो सका।
वाहनों ने बदला अपना रास्ता-
सड़क में सुरंग के सूचना मिलते ही वाहन चालकों ने सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। इन लोगों ने बगल के गांव से अपना रास्ता निकाल लिया है। तो वहीं भूल से भी यदि कोई भारी वाहन इसके ऊपर से गुजरता है तो भयंकर सड़क हादसा हो सकता है। विभागीय अधिकारियों की निष्कृयता देखकर लगता है कि ये लोग जानबूझकर किसी बड़े हादसे को न्यौता दे रहे हैं। ताकि उनके विभाग की चर्चा होनी शुरू हो।
गुणवत्ताहीन सड़कों को लेकर सरकार  गंभीर नहीं-
इस सारे मामले की ह$कीकत ये है कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी प्रदेश की गुणवत्ताहीन सड़कों को लेकर ईमानदार नहीं हैं। यही कारण है कि एक भी तेज बारिश को झेलने की क्षमता अधिकांश सड़कों में नहीं है। जरा सी तेज बारिश हुई नहीं कि कहीं पूरी सड़क बह जाती है तो कहीं उसकी दशा खराब हो जाती है। कुल मिलाकर प्रदेश की अधिकांश सड़कों की हालत ऐसी है।
सड़कों के निरीक्षण पर भी उठे सवाल-
इन सारी सड़कों का निरीक्षण करने केंद्र सरकार की टीम समय-समय पर राज्य का दौरा भी करती है। जो अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देती है। ऐसे में इन निरीक्षकों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आती है कि क्या ऐसी ही सड़कों को पास कर दिया गया?






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