पंचायत भवन में दरारें और नाली में दलाली




मुंगेली  जिले के लोरमी ग्राम पंचायत के बोईरपारा में बिना टिन नंबर वाले फार्मों के माध्यम से शासकीय राशि की बंदरबांट का मामला सामने आया है।आरोप है कि महिला सरपंच और सचिव ढाल सिंह ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है, जिसमें तमाम नियम कायदे को ठेंगा दिखाकर नकद भुगतान किया गया है। इस पूरी घटना की गवाही खुद पंचायत भवन में आई दरारें और वो कच्ची नाली दे रही है जिसकी दलाली के पैसे डकारने के आरोप इन दोनों पर लगाए गए हैं।
बिना टिन नंबर वाले फार्म भर कर किया खजाना खाली, जेसीबी से खुदाई और मस्टररोल में फर्जी मजदूरों के नाम से भुगतान, नियम विरुध्द भुगतान फिर भी प्रशासन मेहरबान


मुंगेली।
क्या है पूरा मामला-
 ग्राम पंचायत बोइरपारा में 13 वें वित्त से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार से प्राप्त हुई है। इसमें पंचायत खाते से नगद भुगतान एवं बिना टिन नंबर वाले फर्म को भुगतान करना दर्शाया गया है । इतना ही नहीं ग्राम में कच्ची नाली का निर्माण किया गया है । इस संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि उस नाली की खुदाई जेसीबी से कराई गई है, किन्तु सरपंच सचिव के द्वारा मजदूरों के नाम पर मस्टर रोल संलग्न कर राशि का भुगतान होना दर्शाया गया है।  इस संबंध में जनपद पंचायत में पदस्थ एपीओ श्री वर्मा का कहना था कि इस संबंध मे मेरे द्वारा जांच की गई है और जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत कार्यालय में जमा किया जा चुका है। वहीं जांच की कंडिकाओं के बारे में उन्होने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।
चेक से भुगतान करने आखिर क्यों है परहेज
        हैरानी की बात है कि नगद भुगतान न करने हेतु शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद ग्राम पंचायतों द्वारा चेक से भुगतान नही किया जा रहा है, संबंधित फर्म से सेटिंग कर नगद भुगतान का सहारा लेकर शासकीय राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।
कैसे देते हैं फर्जीवाड़े को अंजाम-
        शासकीय राशि को खर्च करने की कमान ग्राम पंचायत के  सरपंच व सचिव के हाथों में सौंपी जाती है। इसमें अधिकतम ऐसे हैं जो इस राशि को खैरात समझते हैं। अब इस खैरात का हिस्सा तो सभी को चाहिए। ऐसे में सबसे पहले तो ऐसे फर्म को ढूंढा जाता है। जो सबसे कम कमीशन में बिल बनाकर दे दे और यदि वह फर्म टिन नंबर वाला निकला तो सोने पे सुहागा, नहीं तो कच्चे बिल से काम चला लेते हैं। उसके बाद बारी आती है उस बिल के मूल्यांकन और सत्यापन की उसके बाद संबंधित बाबू और फिर नंबर आता है जनपद पंचायत के सीईओ का और अंतिम में कोई बचता है तो वह है ऑडिटर। जिसकी आपत्ति पर बिल के भुगतान पर रोक भी लग सकती है, पर भले मन से किये इन कामों पर कभी आपत्ति लगती ही नहीं क्योंकि बंदरबांट के इस कारोबार में सभी बराबरी के हिस्सेदार जो होते हैं।  वहीं इस पूरी प्रक्रिया में किसका हिस्सा कितना होता है इसका आंकलन बिलों में दर्शाए आंकड़े करते हैं।
बिना औचित्य के बनाई स्तरहीन नाली-
ग्राम मेें बनी जिस कच्ची नाली के नाम पर राशि की बंदरबांट की गई है उसका कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा है। पंचायत खाते में आए पैसे को डकारने की होड़ में सरपंच ने स्तरहीन कार्य कराया है।  वहीं ग्रामीणों की मानें तो उस नाली की कोई उपयोगिता नहीं है। ऐसे में निर्माण एजेंसी सरपंच एवं सहयोगी सचिव, लेआउट, नक्शा बनाने वाला इंजीनियर, एवं मूल्यांकन व सत्यापन करने वाले तकनीकी ज्ञाताओं की क्या मंशा रही होगी इस निर्माण पर, यह समझ से परे है।
बॉक्स-
भरे तालाब को खाली करने के नाम पर भुगतान
        सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज रोकड़ बही में मूलभूत योजना की राशि से तालाब में गरीकरण हेतु मोटर डीजल पम्प से पानी निकालने के नाम पर कुंजबिहारी पिता रतनकुर्मी को 23 जनवरी 2016 को 30 हजार रुपए का भुगतान करना उल्लेखित है। यह अपने आप में एक अनोखा मामला है जिसमें पानी भरे तालाब को खाली करके गहरीकरण के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया है।
वर्जन-
मामले की जांच रिर्पोट जमा की जा चुकी है, आप जिला पंचायत कार्यालय में जाकर देख सकते हैं।ÓÓ
                            श्री वर्मा, पीओ, जिला पंचायत मुंगेली



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