बिलासपुर की सड़कों पर घूमते मानसिक रोगी



बिलासपुर। मानसिक रोगियों के उपचार को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया था, जिसमें सड़कों पर घूमने वाले मानसिक रोगियों को अस्पताल में भर्ती कर उनका उपचार किया जाना था, लेकिन आज भी दर्जनों मानसिक रोगी बिलासपुर की सड़कों पर भटक रहे हैं। आपको बता दें कि प्रदेश का इकलौता छाया राज्य मानसिक अस्पताल बिलासपुर के सेंदरी में मौजूद है, जो हाई कोर्ट की फटकार के बाद अस्तित्व में आया था, लेकिन यहां गिने-चुने मानसिक रोगी ही भर्ती हैं।
माननीय उच्च न्यायालय की फटकार के बाद भी नहीं हुआ असर-
 उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के अधिवक्ता सीके केसरवानी का कहना है कि इस मामले में स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। दूसरी ओर मानसिक चिकित्सालय के अधीक्षक बीआर नन्दा का कहना है कि सड़क पर घूमने वाले मानसिक रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराना संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस की जिम्मेदारी है।  पुलिस कोर्ट से आदेश लेकर मानसिक रोगी को इस अस्पताल में भर्ती कराती है।  वर्तमान में ऐसे 50 रोगी यहां भर्ती हैं। बिलासपुर शहर में आज भी दर्जनों मानसिक रोगी सड़कों पर घूम रहे हैं, जिन्हें समय पर उपचार मिल जाए तो उनकी जिंदगी फिर एक बार सामान्य हो सकती है।  इनमें से अधिकांश नाबालिग और महिलाएं हैं, जिनकी सुध किसी को नहीं है।  कभी भी उनके साथ कुछ भी हो सकता है।
कलेक्टर और आईजी के बंगलों के पास घूमते हैं बेधड़क-
शहर में आईजी, कमिश्नर और कलेक्टर के बंगलों से महज कुछ ही दूरी पर एक मानसिक रोगी महिला घूम रही है, लेकिन इस युवती पर प्रशासन तो दूर सामजिक संस्थाओं की भी नजर नहीं पड़ी।  पूर्व में मानसिक रोगी महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएं भी हो चुकी हैं।

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