बह गई सड़क भी जांच में फिट...!
-राज्य की अफसरशाही की आंख ने लोकनिर्माण विभाग की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है। मामला सूरजपुर जिले के प्रतापपुर ब्लॉक के जजावल गांव का है। जहां मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत बनी सड़क पहली ही बारिश में पूरी तरह बह गई। अपने साथ हुए भ्रष्टाचार की कहानी खुद ही कह गई। तो वहीं इसके लिए बनी जांच कमेटी ने उसी सड़क को कागजों में फिट बताकर ठेकेदार को उपकृत किया। इस जांच दल में सीईओ जिला पंचायत, ईई पीडब्ल्यूडी, ईई मुख्यमंत्री सड़क योजना और एसडीएम जैसे अधिकारी शामिल बताए जाते हैं। जांच दल के इस रवैये से दु:खी क्षेत्रीय जनता अब मामले को लेकर आंदोलन का मन बना रही है। ऐसे में सवाल तो यही है कि आखिर सच कौन बोल रहा है? जांच कमेटी या फिर मौके असलिया अथवा जनता?
पीएमजीएसवाई के तहत बनी जजावल सड़क का मामला
प्रतापपुर ।
क्या है पूरा मामला-
गौरतलब है कि वर्ष 08-09 में प्रतापपुर क्षेत्र के सबसे पिछड़े और दूरस्थ ग्राम जजावल तक चंदोरा से पीएमजीएसवाई के तहत सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था, जिसमें घाट कटिंग कार्य भी शामिल था, जो जजावल तक पहुँच मार्ग को जटिल बनाती है। सड़क निर्माण स्वीकृति के बाद ठेकेदार ने घटिया निर्माण कराया, सड़क के घटिया निर्माण की बातें शुरू से ही उठने लगी थीं, किन्तु अधिकारियों की मिली भगत से फायदे वाले कार्य कर ठेकेदार आराम से निकल गया। तो वहीं सबसे महत्वपूर्ण कार्य घाट कटिंग को उसने छोड़ दिया।
क्या कहता है नियम-
ऐसे में कानून तो ये कहता है कि ऐसे ठेकेदार का नाम तत्काल काली सूची में डाल दिया जाता है। उसका बाकी का टेंडर रिजेक्ट कर दिया जाता है।
किन्तु अधिकारियों से सांठ गाँठ की वजह से ठेकेदार के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी।
मुख्यमंत्री का आश्वासन बना ठेकेदार के लिए वरदान-
इस वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री रमन सिंह ग्राम सुराज अभियान के तहत जजावल पहुंचे थे जहां उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि घाट कटिंग और सड़क निर्माण का कार्य शीघ्र कराया जाएगा और मुख्यमंत्री का यह आश्वासन पीएमजीएसवाई के अधिकारियों और ठेकेदार के लिए वरदान साबित हो गया। नियमत: विभाग को पूरे काम का नया स्टीमेट बना टेंडर निकाल काम कराना था किन्तु उन्होंने ऐसा न कर पुराने टेंडर में ही काम छोड़ चुके एक ठेकेदार से आनन- फानन में काम करा लिया ताकि सड़क के बचे हुए पैसे का गबन किया जा सके।
हफ्ते भर में बह गई नई सड़क-
घाट कटिंग के नाम पर औपचारिकता पूरी कर सड़क इतनी घटिया बनायी कि बनने के हप्ते बाद ही बारिश में पूरी क़ी पूरी सड़क बह गयी। इसके बाद पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बनारस मार्ग में चंदोरा के पास चक्का जाम किया। तब तहसीलदार प्रतापपुर ने आंदोलनकारियों के साथ मौके पर जाकर वस्तुस्थिति से सम्बंधित पंचनामा भी तैयार किया था, किन्तु ठेकेदार और विभाग पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। पूर्व की तरह ही बाकी कार्यों में घटियापन जारी रहा। इस बीच कलेक्टर ने एक जांच दल् गठित किया।
कौन-कौन थे जांच दल में-
इसमें जिला पंचायत सीईओ,ईई पीडब्लूडी,ईई मुख्यमंत्री सड़क योजना सहित एसडीएम प्रतापपुर को शामिल किया था ।
जांच अधिकारियों को नहीं दिखा भ्रष्टाचार-
ु ताज्जुब की बात है इतने बड़े बड़े अधिकारियों को जजावल घाट कटिंग और सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार नहीं दिखा। जबकि पूरी की पूरी सड़क बह गयी और यह चलने लायक भी नहीं बची। इतने बड़े और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत स्तरहीन जांच प्रतिवेदन के बाद पुरे मामले में इनकी भूमिका संदिग्ध तो नजर आ ही रही है । जनप्रतिनिधियों ने इन पर ठेकेदार से लेन देन का आरोप भी लगाया है।
जनता की शिकायत को बताया निराधार-
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के मेरी सड़क नामक एप्प में आरटीआई कार्यकर्ता राकेश मित्तल द्वारा भेजी शिकायत पर जांच दल के प्रतिवेदन के अनुसार शिकायत को निराधार बताया है। जांच दल के इस शर्मनाक कृत्य पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण ने आक्रोश जताते हुए अपने अधिकार के लिए फिर से आंदोलन करने की बात कही है।
मंत्री ने नहीं उठाया फोन-
इस मामले को लेकर राज्य के लोकनिर्माण मंत्री राजेश मूणत से उनके मोबाइल नंबर 9425202555 पर भी संपर्क किया गया। लगातार रिंगटोन पर श्रीकृष्ण: शरणं मम की रिंगटोन बजती रही मगर फोन नहीं रिसीव किया गया।
अफसरशाही की असलियत-
इस मामले में जब कलेक्टर गोविंदराम चुरेंद्र से उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर-9893509012 पर संपर्क किया गया, लगातार घंटियां बजती रहीं मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
लोक निर्माण विभाग के सचिव अमिताभ जैन से जब उनके मोबाइल नंबर 9826146416 पर लगातार संपर्क किया गया। घंटियां बजती रहीं मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि आखिर सरकार ऐसे अधिकारियों और मंत्रियों को मोबाइल फोन किस लिए देती है? क्या ऐसे ही राज्य की स्थिति में सुधार आएगा?
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