सब्जी के किसानों की सांसत में जान
-जशपुर के पत्थलगांव, अंबिकापुर और रायपुर जैसे जिलों के किसानों की सब्जियों के सही दाम नहीं मिलने से लागत निकालनी मुश्किल हो गई है। बाजारों में एक ओर जहां दलाल कमा कर लाल और गरीब किसान हलाल हो रहे हैं। किसान इसको नोटबंदी से तो दलाल इसको बाजारों मेें सब्जियों की ज्यादा आवक से जोड़कर देख रहे हैं। टमाटर के लिए जहां दलाल किसानों को 25 पैसे प्रति किलो की कीमत दे रहे हैं तो वहीं लोगों तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत लगभग 7 रुपए किलो पड़ रही है। यही हाल बाकी की सब्जियों का भी है। ऐसे में किसानों को उनके उत्पाद की लागत निकालनी मुश्किल हो गई है।
दलाल कमाकर लाल, किसान हो रहे हलाल
रायगढ़ ।
नोटबंदी ने बिगाड़ा कारोबार-
पुसौर ब्लॉक स्थित ग्राम झलमला सब्जी पैदावार में विकासखंड में एक नंबर है। यहां के किसान साल भर सब्जी उगाकर बाजार में बेचते हैं। गांव की आबादी करीबन 1600 है, यहां प्राय: सभी लोग खेती किसानी पर आश्रित हैं। खेतों में धान की फसल के अलावा यहां के लोग साग भाजी लगाते हैं। लगभग 70 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जो सब्जी के व्यवसाय से जुड़े हैं। ऐसे किसानों की आमदनी का जरिया भी सब्जी से जुड़ा है। कुछ माह पहले इनका व्यवसाय फल-फूल रहा था। लेकिन नोटबंदी के फैसले से सब्जी व्यवसाय में गहरा आघात पहुंचा। पहले 20-25 रुपए किलो बिकने वाली सब्जियों को आज 5-7 रुपए में बिचौलियों के हाथ बेचना पड़ रहा है।
कितनी आती है लागत-
इस संबंध में युवा किसान मनोज पटेल ने बताया कि उनके पास दो एकड़ जमीन में वह बारह महीने सब्जी उगाते हैं। एक एकड़ की फसल लेने में उन्हें करीबन 20 हजार खर्च आता है। ठीकठाक कीमत मिलने पर 30 हजार रुपए की आमदनी होती है। लेकिन दाम नहीं मिलने से लागत की वसूली भी नहीं हो पाती। किसान नीलचंद पटेल का कहना कि वह अपने एक एकड़ खेत में पालक की खेती करता है। इस साल पालक के दाम में बेतहाशा गिरावट आई है। पिछले सालों में जहां पालक की कीमत 20-30 रुपए थी, वहीं इस साल 6-7 रुपए हो गया है। किसानों ने कहा कि मंडियों में बैठे बिचौलिये उनसे ज्यादा आमदनी ले रहे हैं। दरअसल सब्जी मंडी में वे औने पौने दाम में सब्जी बेच रहे हैं। वहीं बिचौलिए उंची कीमत में सब्जियों को बेचते हैं।
रेगहा अधिया में खेत लेकर उगाते हैं सब्जी-
झलमला के ज्यादातर किसानों की विडंबना है कि उनके पास सब्जी उगाने पर्याप्त जमीन नहीं हैं। ऐसे में वह दूसरे किसानों से रेगहा व अधिया में खेत लेकर सब्जी उगाते हैं। किसान उसतराम चक्रवर्ती ने बताया कि उनके पास धान की फसल के लिए दो एकड़ जमीन है, जबकि सब्जी उगाने वह दूसरे किसान से अधिया में खेत लेते हैं। ऐसे में सालभर में सब्जी से जितनी आमदनी होती है, उसका आधा हिस्सा भू-स्वामी को देते हैं।
बॉक्स-
25 पैसे किलो बिका टमाटर
टमाटर का रेट 25 पैसे प्रतिकिलो हो गया है। दूसरी हरी सब्जियों का भी यही हाल है। गोभी भी एक-दो रुपये किलो बिक रहा है। बाजार में नकदी का संकट हो गया है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत हो रही है। थोक खरीदारों के पास रुपये नहीं है, जिससे वे माल को खऱीद नहीं पा रहे हैं। साथ ही इन इलाकों में हरी सब्जियों को स्टोर रखने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सब्जियों के खराब होने के डर से किसान अपनी उपज को कम दाम में बेच रहे हैं।
बढ़े टमाटर के दाम, आम जनता परेशान -
पत्थलगांव के इंदिरा चौक बाजार से अंबिकापुर, जशपुर और रायगढ़ की ओर जो सड़कें जाती हैं, उनपर दो-तीन किलोमीटर तक टमाटर ही टमाटर फैला हुआ है। पुलिस द्वारा रोके जाने पर किसान और भी ज्यादा गुस्सा गए और प्रदर्शन करने लगे। दूसरी ओर व्यापारियों का कहना है कि चूंकि बाजार में लोकल टमाटर की सप्लाई हो रही है, इससे भाव गिर गये हैं। इस इलाके में टमाटर ग्रैंडिंग-कैचअप प्लांट भी खोला गया था, जो दो साल से भी ज्यादा समय से बंद पड़ा हुआ है।
क्या कहते हैं किसान-
नोटबंदी के बाद सब्जी मार्केट में मंदी छाई है। इसका असर यह हो रहा है कि हमें अपनी लागत भी नहीं मिल पा रही है।
मनोज पटेल, किसान
मैं अपने परिवार समेत सब्जी के व्यवसाय में पिछले तीस सालों से लगा हुआ हूं। मेरी याददाश्त में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि सब्जियों के दाम इतने निचले पायदान में गये हों। इससे हमारी आर्थिक स्थिति पर काफी प्रभाव पड़ रहा है।
हलधर पटेल
किसान
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