नवजात बच्चों का व्यापार
कोलकाता में नवजात बच्चों की चोरी और उनके बेचे जाने का मामला वास्तव में चौंकाने वाला है। वैसे भी पूरे देश में बच्चों की तस्करी का चलन काफी पुराना है। पुलिस इस मामले में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखकर मामले को टरका देती है। अस्पतालों में आए दिन बच्चा चोरी की घटनाएं होती रहती हैं, मगर इतनी बड़ी चोरी की घटना वास्तव में प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलने के लिए काफी है। इसके साथ ही साथ नवजात बच्चों के इस व्यापार के पीछे जिन डॉक्टर्स का हाथ है, आश्चर्य होता है ऐसे डॉक्टर्स के कारनामों पर। हमारे समाज में लोग डॉक्टर को दूसरा भगवान कहते हैं, मगर इनके इस कृत्य को देखकर तो शैतान भी शर्मा जाए। पश्चिम बंगाल में हर घटना को राजनीति के चश्मे से देखा जाता है। अगर सामने वाले में वोट या फिर नोट की कूबत होती है तो उसके मामले को सियासी तूल दिया जाता है। नहीं तो ऐसे मामलों को भी दबाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाती। ये तो अच्छा हुआ कि समय रहते खुफिया पुलिस ने इनको सूंघ लिया, नहीं तो ये तथाकथित डॉक्टर्स न जाने कितनों के कलेजे के टुकड़ों का व्यापार करते। वैसे भी ऐसा काम कारने वालों का कोई धर्म नहीं होता है। इनके लिए तो पैसा गुरू और सब चेला वाली कहावत लागू होती है। ये पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं। इस मामले में जितने दोषी वो नर्सिंग होम्स वाले डॉक्टर्स हैं उससेे कम दोषी नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग के लोग नहीं हैं। जिन्होंने ऐसे लोगों को नर्सिंग होम्स चलाने का लाइसेंस बांट दिया? इनकी न तो कोई मॉनिटरिंग की जाती है और न ही कोई जांच? सारा काम मनमानी चलाया जा रहा है। ऐसी घटनाओं के पीछे प्रशासनिक लापरवाहियां ही सामने आती हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल की सरकार को चाहिए कि वो समय-समय पर नर्सिंग होम्स की मॉनिटरिंग और निरंतर जांच करे। उनके रजिस्टर भी चेक किए जाएं।इसके अलावा ऐसे अमानवीय कार्य करने वाले डॉक्टर्स का पंजीयन तत्काल रद्द कर उनके ऊपर वैधानिक कार्रवाई की हो, ताकि ये दूसरों के लिए मिसाल बन सके।
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