करोड़ों को कलपता छोड़ विदा हुईं अम्मा



7.78 करोड़ तमिलनाडु वासियों को तड़पता छोड़ गईं,पन्नीरसेल्वम बने सीएम -सब हेडिंग
एंट्रो- चेन्नई। कबिरा हम पैदा भए जगत हंसा हम रोए, ऐसी करनी कर चलो की आप हंसो जग रोए। जी हां तमिलनाडु की 7.78 करोड़ जनता को रोता कलपता छोड़कर उनकी अम्मा...अर्थात जयललिता मंगलवार की शाम को 4:30 बजे पंचतत्व में विलीन हो गईं। मरीन बीच पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के तमाम नेता और अभिनेता मौजूद रहे। जिस तरफ भी निगाह जाती थी अपार जनसमूह, दहाड़ें मार-मार कर रोते उनके समर्थकों को देखकर ऐसा लगता था जैसे अम्मा के जाने से उनका सर्वस्व नष्ट हो गया है। शायद यही एक असल नेता की तस्वीर होनी चाहिए।  रूत्रक्र से जयललिता की काफी नजदीकियां रही थीं। फिल्मों से लेकर पॉलिटिक्स तक दोनों का साथ रहा। रूत्रक्र ही उन्हें पॉलिटिक्स में लाए थे। अम्मा को श्रद्धांजलि देने के नरेंद्र मोदी चेन्नई पहुंचे।
राष्ट्रपति के प्लेन में आई तकनीकी खराबी-
 उधर प्रणब मुखर्जी के प्लेन में तकनीकी खराबी आने के बाद वे बीच रास्ते से ही दिल्ली लौट गए। राहुल गांधी भी चेन्नई पहुंचे। दरअसल सोमवार रात 11.30 बजे 68 साल की जयललिता का निधन हो गया था। वो 76 दिन से हॉस्पिटल में भर्ती थीं।

कब क्या हुआ ..
12:00- राष्ट्रपति दोबारा चेन्नई विशेष विमान से रवाना हुए।
11:45 बजे -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चेन्नई पहुंचे।
11:30 बजे- प्रेसिडेंट को चेन्नई ले जा रहे एयरफोर्स के प्लेन में आई तकनीकी खराबी, दिल्ली लौटा।
11:20 बजे- राजाजी हॉल के पास जयललिता के अंतिम दर्शन करने के लिए बेकाबू हुए लोग। पुलिस ने किया हल्का लाठी चार्ज।
11:00बजे-जयललिता के अंतिम दर्शन के लिए रजनीकांत दामाद धनुष के साथ पहुंचे।
10:30बजे -प्रणब मुखर्जी ने कहा- जयललिता एक जुझारू नेता थीं। डेवलमेंट के मुद्दों पर उनसे कई बार बातचीत हुई। जब वे राज्यसभा सदस्य बनीं मैं सदन का नेता था। फैक्ट्स और थ्योरी पर उनकी काफी पकड़ थी।
10:0बजे-जयललिता को राज्यसभा-लोकसभा में श्रद्धांजलि दी गई। उसके बाद दिनभर के लिए सदन स्थगित।
9:05 बजे-चेन्नई में दुकानें, बाजार बंद। कई प्राइवेट कंपनियों ने भी छुट्टी का एलान किया।
8:50 बजे-तमिलनाडु में 7 दिन का शोक रहेगा। राज्य में तीन दिन स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे। साथ ही उत्तराखंड, कर्नाटक और बिहार जैसे राज्यों ने भी जयललिता के सम्मान में एक दिन के शोक का एलान किया है।

अंतिम संस्कार 4:30 बजे रखने की खास वजह
- जयललिता परंपरावादी अयंगर ब्राह्मण परिवार से थीं। ज्योतिष में उनका काफी विश्वास था। 5 और 7 अंक को वे अपने लिए शुभ मानती थीं
- संयोग ही है कि उनकी मौत 5 तारीख को हुई। डॉक्टरों के मुताबिक उन्होंने अंतिम सांस 5 दिसंबर रात 11:30 पर ली। आधा घंटा और बीतता तो 6 तारीख लग जाती।
- जयललिता की पॉपुलरिटी को देखते हुए उन्हें बुधवार तक अंतिम दर्शन के लिए रखा जाना था। उनका अंतिम संस्कार 7 तारीख को होता।
- लेकिन, ज्योतिष के मुताबिक बुधवार को अष्टमी तिथि है। जयललिता अष्टमी को कोई शुभ काम नहीं करती थीं। फिर, अंतिम यात्रा अष्टमी को कैसे हो सकती थी।
- अंतिम संस्कार का वक्त भी ज्योतिष के मुताबिक तय हुआ। तमिल पंचांग के मुताबिक, मंगलवार शाम 3:  30 से 4:30 बजे तक राहू काल है।
- जयललिता राहू काल में भी कोई काम नहीं करती थीं। इसलिए उनका अंतिम संस्कार 4:30 बजे किया जाना तय हुआ।
रूत्रक्र को भी राजाजी गार्डन में रखा गया था
चाय बेचने वाला बना चेन्नई का सीएम-
-कभी चाय बेंचने वाले पन्नीरसेल्वम सीएम बन गए। वे जया के करीबी थे, लेकिन कई विधायक उन्हें पसंद नहीं करते हैं। इसीलिए विधायकों से लिखित में लिया गया है।
- सरकार का करीब 4 साल का समय बाकी है। ऐसे में मुमकिन है कि कुछ वक्त बाद बगावत न हो जाए।
पार्टी में पड़ सकती है फूट-
- 44 साल पुरानी एआईएडीएमके में दो ही नेता हुए हैं। पहले एमजीआर और फिर जयललिता।
- अभी शशिकला को जनरल सेक्रेटरी बनाए जाने की चर्चा है।
- 6 महीने बाद पार्टी की अगुआई करने को लेकर लड़ाई शुरू हो सकती है। पार्टी टूट सकती है।
बीजेपी या कांग्रेस होगी ऑप्शन
- 49 सालों में तमिलनाडु में सिर्फ दो ही पार्टियां ्रढ्ढ्रष्ठरू्य या ष्ठरू्य की सरकार रही है।
- जयललिता रही नहीं। करुणानिधि भी 92 साल के हैं।
- ऐसे में, बीजेपी और कांग्रेस राज्य में अपनी जमीन मजबूत करना चाहेंगी।
- जयललिता की पार्टी ्रढ्ढ्रष्ठरू्य पर दोनों पार्टियों की नजरें होंगी।
पुलिस बल तैनात-
 जयललिता के आवास पर भी हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. दिन गुजरने के साथ बड़ी संख्या में समर्थकों तथा अन्ना द्रमुक कार्यकर्ता भी यहां पहुंचे।  किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए जयललिता के अवास परिसर के चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
बॉक्स-   
लाखों की अम्मा का कोई नहीं था अपना
लाखों लोगों की अम्मा कहलाने वाली जयललिता का परिवार से कोई रिश्ता-नाता नहीं बचा था। जया 2 महीने से भी ज्यादा समय से अस्पताल में भर्ती थीं लेकिन इस दौरान उनका कोई रिश्तेदार उनके साथ नहीं था। यहां तक की जया के भाई की बेटी ने अस्पताल में एक बार उनसे मिलने की कोशिश भी की मगर पुलिस ने अंदर नहीं घुसने दिया। जयललिता के भाई जयकुमार की बेटी दीपा ने हॉस्पिटल पहुंचकर जब पुलिसवालों को बताया कि वह कौन हैं, तो भी उन्हें जया से मिलने की इजाजत नहीं मिली। साल 2014 में भी दीपा और उनके पति माधवन ने जया के जेल से छूटने पर उनसे मिलने की कोशिश की थी।
 जयललिता का जीवन परिचय -
जयललिता के राजनीतिक गुरु, एआईएडीएमके के संस्थापक और करिश्माई नेता एमजीआर का निधन भी दिसंबर (24 दिसंबर 1987) में हुआ था। अभिनेता से राजनेता बने एमजीआर की उत्तराधिकारी जयललिता ने भी लंबी बीमारी से जूझने के बाद दिसंबर में प्राण त्याग दिए।

इत्तेफाक की बात है कि दोनों ही नेता मौत से पहले लंबे वक्त तक बीमार रहे। अन्य हस्तियों में भारत के आखिरी गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी की मौत 25 दिसंबर 1972 को हुई थी। वहीं, पेरियार ई वी रामास्वामी की मौत 24 दिसंबर 1972 को हुई। दोनों की उम्र 94 साल थी।

प्रकृति ने भी तमिलनाडु पर जमकर कहर बरपाया था। साल 2004 में सुनामी ने 26 दिसंबर को यहां दस्तक दी थी। इसमें हजारों लोगों की जान चली गई थी और लाखों लोगों की जिंदगी अर्श से फर्श पर आ गई थी। वहीं, दिसंबर 2015 में हुई मूसलाधार बारिश ने चेन्नै, कांचीपुरम, कडलोर, तिरुवल्लोर आदि जगहों के लोगों को बुरी तहर प्रभावित किया था।

किस के लिए क्या बदलेगा-
डीएमके और एआईएडीएमके पर असर-
जयललिता के निधन का मतलब है उनकी विरोधी पार्टी डीएमके अब कुछ चैन की सांस ले सकती है। एआईएडीएमके के पास अब हमेशा एक ऐसे नेता की विरासत रहेगी जिसने राजनीति में रुचि नहीं होने के बावजूद डीएमके के करुणानिधि जैसे धुरंधर नेता को पटखनी दी।
लेकिन एआईएडीएमके की विडंबना ये है कि उसके पास दूसरी पंक्ति के उस तरह के नेता नहीं हैं जिस तरह डीएमके के पास हैं।
करिश्माई नेता अम्मा के जाने के बाद एआईएडीएमके किस तरह आगे बढ़ेगी या बिखर जाएगी, इस बारे में आशंकाएं बनी रहेंगी।
कांग्रेस और बीजेपी के लिए राहत-
केंद्र सरकार को जयललिता के रहते हुए तमिलनाडु की परियोजनाओं को क्लीयर करने के बारे में कड़े रुख़ का सामना करना पड़ता था। संभव है कि जयललिता की ग़ैर-मौजूदगी में ऐसा न हो।
केंद्र को अब कावेरी नदी के बंटवारे और मुल्ला पेरियार बांध के मामले में भी कुछ राहत महसूस होगी क्योंकि इन मामलों में अम्मा के रुख़ से कर्नाटक और केरल हमेशा भयभीत रहते थे।
जयललिता के निधन से संघीय ढांचे में केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर नजऱ आएगा। केंद्र में बीजेपी रही हो या कांग्रेस, जयललिता ने किसी को नहीं बख़्शा था, लेकिन अम्मा के निधन के बाद बीजेपी उनकी पार्टी में उभरने वाली कमज़ोरियों का तमिलनाडु की राजनीति में फ़ायदा उठा सकती है। वहीं कांग्रेस को भी कुछ राहत मिलेगी क्योंकि जयललिता कांग्रेस का पुरज़ोर विरोध करती रही थीं जिसकी वजह से कांग्रेस डीएमके के अधिक करीब रही हैं।
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