सरकार ने खींची छत्तीसगढ़ के विकास की खाल






छत्तीसगढ़ के विकास का नगाड़ा पीटने वाली सुराज की सरकार के मुखिया और उनके सुखिया अधिकारी गलतियां कर गए बड़ी भारी। भारत सरकार द्वारा जारी सामाजिक-आर्थिक एवं जनगणना के आंकड़ों ने खोल दी सारी पोल, जिसमें दिखाई दे रहा है विकास का डब्बा गोल। सच्चाई ये है कि राज्य के गांवों में 3 प्रतिशत परिवारों का कोई एक सदस्य 10 हजार रुपए के ऊपर कमाता है। 1 फीसदी परिवारों के पास हैं कृषि उपकरण,45 लाख परिवार गरीब, 15 लाख परिवार अशिक्षित और इतने ही भूमिहीन, ऐसी है इस नए राज्य की  असल सीन। देख लीजिए आप भी 16 साल के विकास का हाल, कि कैसे इस सरकार और उसके निकम्मे अधिकारियों ने खींची छत्तीसगढ़ के विकास की खाल। पेश है इसी सच्चाई को उजागर करती हमारी सरकार की ये विशेष रिपोर्ट....।
झूठे आंकड़े पेश करने में भी छत्तीसगढ़ नंबर वन
सरकारी आंकड़े में अधिकारी गए पकड़े, विधान सभा में भी पेश किए झूठे दावे
रायपुर ।  छत्तीसगढ़ के गांवों में बेहद गरीबी तथा अशिक्षा पसरी हुई है।  इसका खुलासा भारत सरकार द्वारा जारी सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना के आंकड़ों से होता है।  इसके अनुसार छत्तीसगढ़ के गांवों में महज 3 फीसदी परिवारों का कोई एक सदस्य माह में 10 हजार रुपये से ऊपर कमाता है।  महज 1 फीसदी परिवार के पास मशीनीकृत कृषि के उपकरण हैं।  केवल 1.5 फीसदी परिवारों के पास सिंचाई के एक उपकरण तथा ढ़ाई एकड़ या उससे ज्यादा की सिंचित जमीन है।  सरकारी आंकड़ें चीख-चीखकर ऐलान कर रहे हैं कि बीते 16 सालों में छत्तीसगढ़ का जो विकास हुआ है वह गांवों तक नहीं पहुंच सका है।

जाहिर है कि जिस राज्य के 45 लाख के करीब परिवार गरीब हैं उस राज्य के बाशिंदों की क्रय शक्ति भी कम होगी।  नतीजन यहां का बाजार केवल शहरी क्षेत्रों के भरोसे चल रहा है।
कहां से मिले ये आंकड़े-
भारत सरकार द्वारा जारी सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 45 लाख 40 हजार 999 परिवार निवासरत हैं।  यह जानकारी गुरुवार यहां छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग की बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से दी गयी। आयोग के अध्यक्ष चंद्रशेखर साहू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास पी.सी. मिश्रा ने सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आंकड़ों का विस्तार से ब्यौरा दिया।
इनको किया गया शामिल-
 इन जानकारियों में व्यवसाय, शिक्षा, नि:शक्तता, धर्म, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति, जाति-जनजाति का नाम, रोजगार, आय और आय का साधन, परिसंपत्तियां, मकान, टिकाऊ और गैर टिकाऊ उपभोक्ता सामान तथा भूमि शामिल है।  भारत सरकार द्वारा सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना में प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब जरूरतमंद परिवारों के पहचान के लिए तीन स्तरीय रैंक के आधार पर सूचकांक निर्धारित किए गए हैं।
अत्यंत गरीबों की संख्या-
 कम से कम एक सूचकांक धारक परिवारों की संख्या 8 लाख 19 हजार 609 है।  इन सूचकांकों के अनुसार मोटर चलित दोपहिया, तिपहिया, चार पहिया वाले वाहन एवं मछली पकडऩे की नाव वाले परिवारों की संख्या चार लाख 93 हजार 940 है।
कितने लोग करते हैं मशीनों का उपयोग-
मशीनीकृत तीन एवं चार पहिया कृषि उपकरण वाले पारिवारों की संख्या 52 हजार 991 है।  50 हजार रुपए एवं इससे अधिक लिमिट वाले किसान क्रेडिट कार्ड धारक परिवारों की संख्या 99 हजार 079 है।
सरकारी नौकरी करने वाले लोग-
सरकारी सेवक वाले सदस्यों की परिवार संख्या एक लाख 98 हजार 268 है।  सरकार में पंजीकृत गैर कृषि उद्योग वाले परिवार की संख्या 25 हजार 984 है।  परिवार का कोई भी सदस्य 10 हजार रुपए प्रति माह से अधिक कमाता है, ऐसे परिवारों की संख्या एक लाख 45 हजार 294 है।  आयकर अदा करने वाले परिवारों की संख्या 81 हजार 909 है।
व्यवसायिक करदाता-
व्यवसायिक कर अदा करने वाले परिवारों की संख्या भी 81 हजार 909 है।  सभी कमरों में पक्की दीवारों एवं छत के साथ तीन अथवा अधिक कमरे वाले परिवारों की संख्या दो लाख 79 हजार 212 है।  रेफ्रीजरेटर रखने वाले परिवार की संख्या एक लाख 49 हजार 420 है।  लेंडलाइन फोन वाले परिवारों की संख्या 30 हजार 415 है।
कम भूमि वाले परिवारों की तादाद-
कम से कम एक सिंचाई उपकरण के साथ ढाई एकड़ अथवा इससे अधिक सिंचित भूमि वाले परिवारों की संख्या 71 हजार 672 है।  दो अथवा इससे अधिक फसल के मौसम के लिए पांच एकड़ अथवा इससे अधिक सिंचित भूमि वाले परिवार की संख्या 40 हजार 120 और कम से कम एक सिंचाई उपकरण के साथ कम से कम साढ़े सात एकड़ अथवा इससे अधिक भूमि वाले परिवारों की संख्या 51 हजार 298 है।
 गरीब परिवारों की संख्या एक लाख 12 हजार 084 है।  इस सूचकांक का परिवार  परिवारों की सूची में शामिल हो जाएंगे।  इस सूचकांक के तहत बेघर परिवारों की संख्या सात हजार 083 एवं निराश्रित-भिक्षुक परिवारों की संख्या 23 हजार 894 है।
मैला ढोने वाले नहीं मिले-
छत्तीसगढ़ में मैला ढोने वाले परिवारों की संख्या पुनर्सत्यापन में निरंक पाई गई है।  तद्नुसार संशोधन के लिए भारत सरकार को अवगत कराया गया हैं।  आदिम जनजाति समूह परिवार की संख्या 81 हजार 636 और कानूनी रूप से विमुक्त किए गए बंधुआ मजदूर परिवारों की संख्या 158 है।
और क्या-क्या कहते हैं आंकड़े-
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार सात वंचन सूचकांक में शामिल परिवारों की जानकारी इस प्रकार है-
कच्ची दीवारों और कच्ची छत के साथ केवल एक कमरे में रहने वाले परिवारों की संख्या 13 लाख 14 हजार 420 है।  परिवार में 16 वर्ष से 59 वर्ष के बीच की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं होने वाले परिवारों की संख्या दो लाख 93 हजार 609 है। महिला मुखिया वाले परिवार जिसमें 16 वर्ष से 59 वर्ष के बीच की आयु का कोई वयस्क पुरूष सदस्य नहीं है, ऐसे परिवारों की संख्या तीन लाख 8 हजार 440 है।  नि:शक्त सदस्य वाले और किसी सक्षम शरीर वाले वयस्क सदस्य से रहित परिवारों की संख्या 36 हजार 889 है।
15 लाख परिवारों में  नहीं हैं साक्षर-
अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति परिवारों की संख्या 19 लाख 12 हजार 192 है।  ऐसे परिवार जहां 25 वर्ष से अधिक आयु का कोई वयस्क साक्षर नहीं है, ऐसे परिवारों की संख्या 15 लाख 38 हजार 616 और भूमिहीन परिवार जो अपनी ज्यादातर कमाई दिहाड़ी मजदूरी से प्राप्त करते हैं, ऐसे परिवारों की संख्या 15 लाख 83 हजार 648 है।
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