69 साल में पहली बार भालूडिगी गांव पहुंचे एसडीएम



 गरियाबंद।  जिले के सबसे दुर्गम स्थान पर बसे कुल्हाड़ीघाट के आश्रित गांव भालूडिगी के लोग विस्थापन के लिए तैयार नहीं हैं।  लाख मुसीबतें और समस्याएं झेलने के बाद भी भालूडिगी के ग्रामीण अपना बसेरा छोडऩा नहीं चाहते हैं और उन्होंने अपने लिए वहीं पर सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है।  आजादी के 69 साल के इतिहास में भालूडिगी के लोगों को शायद ही याद होगा कि कोई सरकारी अधिकारी उनकी खोज खबर लेने के लिए उनके गांव आया हो। 
10 किमी पहाड़ी चढ़कर पहुंचे देवभोग एसडीएम शैलाभ साहू -
 रविवार का दिन उनके लिए किसी सातवें अजूबे से कम नहीं था, जब देवभोग के एसडीएम शैलाभ साहू 10 किमी का पहाड़ चढ़कर उनसे मिलने गांव पहुंचे।
कई सालों से बंद पड़ी है सौर ऊर्जा लाइट-
 भालूडिगी कहने को तो 21वीं सदी का गांव है, मगर इस गांव में सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है।  गांव में सड़क तो दूर पगडंडी तक नहीं है।  लोगों को नदी-नाले और पहाड़ पार करके गांव तक पहुंचना पड़ता है।  रोशनी के लिए शासन ने कई साल पहले सौर ऊर्जा की व्यवस्था की थी, मगर मेंटिनस के आभाव में अब वो भी बंद पड़ी है।  एसडीएम ने गांव के हालात का जायजा लिया और शासन की विस्थापन योजना की जानकारी देते हुए उन्हें पहाड़ से नीचे बसाकर सभी सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वसन भी दिया,  मगर वहां के ग्रामीणों ने इससे साफ मना करा दिया।



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