शहीदों को कैसे सलामी देंगे ये अफसर




 जो नक्सली हमारे जवानों की पत्नियों को विधवा बना रहे हैं, जिन हाथों ने निरीह आदिवासियों के गले धारदार हथियारों से रेत कर उनकी हत्या की। तमाम पुलिस वालों को बम से उड़ा दिया। सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया। अचानक ऐसा कौन सा चमत्कार हुआ कि मंगलवार को उनकी शादी में शासन-प्रशासन के अधिकारी आशीष देने दौड़ पड़े? सरकारी बारात में अतिथि बनकर कलेक्टर अमित कटारिया और बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी भी जा पहुंचे। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि सामने ही 15 अगस्त है। जब शहीदों की विधवाओं को सम्मानित किया जाएगा तो उस वक्त ये अफसर उनकी विधवाओं को क्या जवाब देंगे? कि जिसने तुम्हारा सुहाग उजाड़ा हमने उनकी शादी बड़ी धूमधाम से करवाई?

किस हाथ से ये शहीदों को सलामी देंगे?
 माओवादियों को दुल्हन और सरकारी नौकरी-
शादी के बाद इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकारी नौकरी भी तोहफे में दी जा रही है। ऐसे में सवाल तो यही है कि क्या सरकार भी यही चाहती है कि युवा बेरोजगार पढ़ाई छोड़कर नक्सलवाद की राह पर चले जाएं? ताकि सरकारी पैसों से शाही अंदाज में शादी हो, दुल्हन मिले और सरकारी नौकरी भी? इन नव विवाहित जोड़ों को आरक्षक बनाया गया और लड़की के भाई को सिपाही। अब आदिवासियों के जो बच्चे पढ़ लिखकर लंबी दौड़ लगाकर परिश्रम करके पुलिस में जाना चाह रहे होंगे उनमें क्या संदेश जाएगा?

्रसुरक्षाबलों के जवानों पर क्या बीतेगी-
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तर्ज़ पर अपने धुर विरोधी नक्सलियों की शादी में अपने ही अफसरों की मौजूदगी को देखकर सुरक्षाबलों के जवानों के दिल पर क्या बीतती होगी? क्या इससे उनका मनोबल नहीं टूटेगा? ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि जब सरकार सारे नक्सलियों की मांगों को मान कर उनकी सारी व्यवस्थाओं को सरकारी खर्चे पर कर रही है।
सरकारी पैसों और जानमाल की बरबादी क्यों-
अगर ये सही रास्ता है तो फिर सरकार बस्तर में बिना काम के सरकारी पैसों को इस तरह क्यों पैसे फूंक रही है? मुठभेड़ों में जवानों की शहादत अलग से हो रही है। इसकी क्या जरूरत है? फिर तो इनके साथ बैठ कर इसका तत्काल हल निकाल लिया जाए। जो चार छह सौ शादियां करवानी हो इक_े सरकारी बजट से करवा दी जाएं समस्या खत्म।
नक्सलियों की हालत खराब-
हमारे जांबाज जवानों ने पिछले दिनों जिस बहादुरी के साथ नक्सलियों को मुुंहतोड़ जवाब दिया है। उससे  बस्तर में इनकी जड़ें तक हिल गई हैं। इनको होने वाले गोला-बारूद के आपूर्तिकर्ताओं की नाक में भी हमारे जवानों ने नकेल कस दी है। इसका प्रमाण है बड़ी मात्रा में होने वाली विस्फोटकों की बरामदगी।
बारूदी सुरंगें भी हुईं फ्लॉप-
लिट्टेई अंदाज में जिन बारूदी सुरंगों में विस्फोट कराकर नक्सली हमारे सुरक्षाबलों के जवानों को चोट देते थे। हमारे काबिल अफसरों की क्षमता के कारण उनका ये हथियार भी फुस्स हो गया। इसमें भी भारी कमी आई है तो वहीं तमाम बारूदी सुरंगें बरामद हुई हैं।
फिर क्यों झुकने पर उतारू हैं कल्लूरी-
बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी की आखिर वो कौन सी मजबूरी है कि वो इतना सबकुछ होने के बावजूद भी नक्सलियों के आगे सी की मुद्रा में झुके जा रहे हैं? फोर्स के एक जांबाज अफसर से देश ये उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं करता। इनके इस कारनामे से राज्य के ही नहीं देश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
सवाल सुनते ही काट दिया फोन-
इस संदर्भ में जब उनका पक्ष जानने के लिए बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई। तो उन्होंने पहले तो प्रश्र सुना और उसके बाद फोन काट दिया। दोबारा उनसे तमाम कोशिशों के बावजूद भी संपर्क नहीं हो सका।
गृहमंत्री ने नहीं उठाया फोन-
प्रदेश के गृह एवं जेल मंत्री रामसेवक पैकरा के फोन पर उनका भी पक्ष लेने की हमारी सरकार की कोशिश नाकाम साबित हुई। लगातार कॉल करने के बावजूरद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया। इससे साफ जाहिर है कि प्रदेश के गृहमंत्री राज्य की व्यवस्थाओं को लेकर कितने सजग हैं?

क्या है पूरा मामला-
दरअसल, जिले के दरभा ब्लॉक में आत्मसमर्पित नक्सलियों की शादी का समारोह था। नक्सल प्रभावित दरभा क्षेत्र में मंगलवार को जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और दो परिवारों के सहयोग से दो आत्मसमर्पित माओवादियों की शादी कराई गई। इस अनोखी और भव्य शादी में दुल्हा बने आत्मसमर्पित माओवादी बुधराम का लछमती और मानसाय ने पदमिनी का हाथ थामा। उसके बाद चारों को पुलिस विभाग में आरक्षक की नौकरी भी दी गई।

नाचते-गाते लोग-
दरभा तहसील को जनवासा बनाया गया था। जहां धूमधाम से मानसाय और बुधराम दुल्हा बनकर अपनी दुल्हनियां लेने के लिए निकले थे।

आईजी और कमिश्नर बने अतिथि-
दोनों की शादी में बस्तर रेंज के आईजी, बस्तर कमिश्नर, एसपी और जगदलपुर जिले के कलेक्टर अमित कटारिया आशीर्वाद देने के अतिथि मेहमान बनकर पहुंचे थे।
मंदिर में हुई शादी
इस शादी को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। दरभा के दुर्गा मंदिर में मानसाय ने  पदमिनी और बुधराम ने लछमती से शादी कर अटूट बंधन में बंध गये। इस मौके पर बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी ने वर-वधु के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद दिया।

बाराती बने कलेक्टर व आईजी-
उन्होंने माओवादी संगठनों से अपील की कि वे भी मुख्यधारा में शामिल होकर खुशहाल जीवन जीने के लिए शांति का रास्ता अपनायें। वहीं जिले के एसपी आरएन दास ने शादी के बंधन में बंधे आत्मसमर्पित माओवादी जोड़ों के लिए उनके मंगल जीवन के लिए शुभकामनाएं। साथ ही जिला प्रशासन ने सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ दिलाने की बात कही।
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