शिक्षा की बिगड़ी चाल

कटाक्ष-

निखट्टू-
हमारे एक मित्र ट्यूशन पढ़ाने बगल वाली भाभी के घर आते हैं। उनके अंग्र्रेजी माध्यम के बच्चे जॉनी को ट्यूशन पढ़ाते हैं। एक महीने होने को आ गया तो उन्होंने पैसों की बात की। भाभी ने बात को लपकते हुए बड़े प्यार से समझाया अरे भइया जॉनी आपके भी तो बेटे समान है। अरे बेटे समान क्या बेटा तुम्हारा ही है।  सुनते ही मैं चकरा गया। मैंने कहा ये महिला होकर भी एक अध्यापक के चरित्र पर प्रश्रवाचक लगा रही है। अपने बेटे को उसका बेटा बता कर पचास रुपए थमा रही हैं। इसको भी रही है मान-सम्मान  यानि अंगे्रजी स्कूल की पढ़ाई पर पचास रुपए का मान सम्मान? अरे वाह रे बेईमान।  दूसरे दिन वो अध्यापक भी पूरे तेवर में आया..... सूरज पश्चिम में निकलता है जोर-जोर से रटाया। सुनते ही जॉनी का बाप डेनियल दौड़ा-दौड़ा आया बोला ये क्या कर रहे हो। अरे बच्चे के दिमाग में उल्टा पाठ भर रहे हो? अध्यापक ने कहा गुरू अपना सूरज तो पूरब में तभी निकलेगा जब डेढ़ हजार दोगे वर्ना पश्चिम में उगाऊंगा और बाईपास ले जाकर उत्तर में डुबाऊंगा। शिक्षा की ये बिगड़ी चाल देखकर मैं तो गया डर..... तो अब सीधे निकल लेता हूं अपने घर कल फिर आपसे मुलाकात होगी तब तक के लिए जय...जय।
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