बढ़ाकर भाड़ा अब सुना रहे पहाड़ा.

प्रभू ने यूं बढ़ाया रेल का किराया कि लोगों की समझ में कुछ नहीं आया


मेल और एक्सप्रेस गाडिय़ों में 43 और लोकल टिकटों पर 36 प्रतिशत की सब्सिडी का दावा करने वाली भारतीय रेल ने बड़े ही आराम से देश की 42 राजधानी, 46 शताब्दी तथा 54 दुरंतो ट्रेनों के किराए में 10 से 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तर कर दी। ऐसे में रेल किराए के नाम पर एक बार फिर जनता का जेब काटी जा रही है। उस पर भी तुर्रा ये है कि इसको अभी ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है, यानि बढ़ाकर भाड़ा सुना रहे हैं पहाड़ा? असल में सरकार अभी जनता का मूड देख रही है कि अगर विरोध हुआ तो ये कहकर बंद कर देंगे कि ठीक नहीं है। और  नहीं हुआ तो लगा रहने देंगे। अभी तक रेलवे का कोई जिम्मेदार अधिकारी ये बोलने को तैयार नहीं है कि इतने पैसे खर्च करने के बाद आपको कन्फर्म सीट दी जाएगी। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि क्या रेल मंत्रालय ने विभाग को लूट की खुली छूट दे दी है?

हमने पहले ही दे दिया था संकेत-
 हमारी सरकार ने कई महीने पहले ही इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि रेल मंत्रालय यात्रियों से मोटा पैसा वसूलने की फिरा$क में है। और आखिरकार वही हुआ भी। अब मंत्रालय इस बात के इंतजार में है कि इसका विरोध होता भी है या फिर जनता आसानी से मान लेती है।

कैसे बढ़ेगा भाड़ा-
विमानन क्षेत्र की तरह मांग के अनुसार किराया या लचीली किराया प्रणाली इन तीन ट्रेनों में परीक्षण के आधार पर सेकेंड एसी, थर्ड एसी तथा चेयरकार और दुरंतो ट्रेनों में स्लीपर क्लास में लागू हो गई है। हालांकि, इन रेलगाडिय़ों में फस्र्ट एसी तथा एक्जिक्यूटिव श्रेणी की यात्रा के लिए मौजूदा किरायों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पहली दस प्रतिशत सीटों पर भाड़ा जितना लगना चाहिए उतना ही लगेगा। उसके बाद की दस प्रतिशत सीटों पर दस प्रतिशत की दर से भाड़ा बढ़ेगा। और फिर ये बढोत्तरी क्रमश: 50 प्रतिशत तक की होगी। ऐसे में तो ज्यादा से ज्याद यात्रियों की जेब तराशी होगी। मंत्रालय के अधिकारियों का तर्क है कि इसमें सीटों की मांग के आधार पर उतार चढ़ाव भी होता रहेगा। यानि दिसंबर में जब ज्यादा लोग रेल में सफर नहीं करते तो सीटें सस्ती रहेंगी और होली दीपावली और दशहरे एवं ईद में सीटों के दाम आसमान पर होंगे। इसका फायदा जमकर रेलवे विभाग उठाएगा।
दलालों की राह पर चल निकला रेल मंत्रालय-
पहले रेल यात्रियों को दलाल जमकर लूटते थे। अब रेल मंत्रालय ने भी इसकी खुली छूट दे दी। यानि अब दस से 50 प्रतिशत तक तो रेल मंत्रालय को दे दो उसके बाद जो दलाल लूट सके उसकी काबिलियत।
त्यौहारों की हो चुकी है शुरुआत-
गणेश पूजा से ही हमारे यहां शरदीय नवरात्रि की तैयारियां शुरू हो जाती है।  जब नौ दिनों की उपासना होती है। उसके बाद दशहरा और फिर दीपावली  उसके पश्चात छठ महापर्व जैसे तमाम त्यौहार आते हैं। ऐसे में सीटों की मांग आसमान छूती है। जाहिर सी बात है कि परीक्षण की आड़ में रेलवे मंत्रालय जमकर खिलवाड़ करेगा।
 क्यों पड़ी इसकी जरूरत-
रेलवे को सालान करीब 34,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।  इसकी भरपाई करने के लिए रेल मंत्रालय इस तरह के खेल खेलने में लगा है। तो वहीं जानकारों का ये भी मानना है कि इस योजना से रेल मंत्रालय को लगभग 5 सौ करोड़ की कमाई होगी। तो वहीं इसकी सफलता से उत्साहित रेलवे कहीं ऐसा न हो कि देश की बाकी ट्रेनों में भी इसको लगा दे ।
सब्सिडी का खेल-
रेलवे ने अब यात्रियों को यह याद दिलाना शुरू कर दिया है कि वो टिकटों पर सब्सिडी के जरिए यात्रियों पर कितना अहसान कर रही है।  दरअसल, केन्द्र सरकार के निर्देश के बाद रेलवे ने यात्री टिकटों पर यह लिखना शुरू कर दिया है कि अब यात्रियों को भारतीय रेलवे आपसे टिकट पर कुल लागत का औसतन 57 फीसदी किराया वसूल रहा है। 
क्या लिखा है टिकट पर-
रेलवे टिकट पर  लिखा जा रहा हैै कि रेलवे आपसे टिकट पर कुल लागत का औसतन 57 फीसदी किराया वसूल रहा है।  इसका मतलब है कि बाकी 43 फीसदी खर्च रेलवे खुद उठी रहा है।  लोकल ट्रेन में तो मुसाफिरों से 36 फीसदी ही किराया लिया जाता है बाकी 67 फीसदी रेलवे खुद खर्च करती है। 
क्या है हिसाब -
उदाहरण के लिए थर्ड एसी का किराया हम देते हैं 1628 रुपये, जबकि रेलवे को इस पर 2856 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।  दिल्ली-पटना संपूर्ण क्रांति में हिसाब देखें तो थर्ड एसी का किराया देते हैं 1300 रुपये इस पर रेलवे के 2033 खर्च होते हैं। 
यात्रियों की जागरूकता के लिए कदम-
वहीं पूरे मामले पर रेलवे का कहना है कि इसे जागरूकता के लिए उठाया गया कदम बताते हुए कहा है कि इससे यात्री अवगत हो सकेंगे कि यात्रा पर कितनी लागत आ रही है और रेलवे कितना भार उठा रहा है। 
क्या हैं इसके मायने-
इस बहाने रेल मंत्रालय लोगों को दिमागी तौर पर इस बात के लिए तैयार कर रहा है कि वे इस बात को समझें कि रेलवे उनके टिकट पर इतनी राशि की सब्सिडी दे रहा है। उसको कभी भी वापस लिया जा सकता है। यानि परोक्ष में ये सीधे-सीधे यात्री किराए में बढोत्तरी के संकेत थे,और वही हुआ भी।

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