खाद्य निरीक्षक मेहरबान तो दुकानदार पहलवान


 लोरमी तहसील के उजियारपुर गांव में अक्सर अंधेरा रहता है। कारण है मिट्टी का तेल न मिलना। गांव वाले इसका कारण बताते हैं कि यहां के राशन दुकानदार पर खाद्य निरीक्षक मेहरबान हैं। फूड इंस्पेक्टर की इसी रहम दिली का नतीजा है कि कई बार उसकी दुकान में स्टॉक से ज्यादा केरोसीन बरामद होने के बावजूद भी उस पर कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में गांव के लोग ही अब इस इंस्पेक्टर की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

        मुंगेली।
क्या है पूरा मामला-
लोरमी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत उजियारपुर के लोगों में उस वक्त कौतुहल की स्थिति निर्मित हुई जब लोरमी के खाद्य निरीक्षक मयंक श्रीवास्तव ने मुखबिर की सूचना पर अचानक की वहां के शासकीय उचित मूल्य की दुकान में कैरोसीन की कालाबाजारी की सूचना पर दबिश दे दी। उन्हे सूचना मिली थी कि गांव का ही रहने वाला अगनू घृतलहरे अपने घर में पीडीएस के तहत वितरण किये जाने वाले मिट्टी के तेल का भण्डारण कर रखा है जिस पर खाद्य निरीक्षक के द्वारा मौके पर 270 लीटर कैरोसीन मिलने की बात की पुष्टि भी की गई मगर खाद्य निरीक्षक ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए जब्ती की कार्रवाई नहीं की उल्टा जांच प्रतिवेदन उच्चाधिकारी को सौंपने की बात करने लगे।
लिखित शिकायत के बाद भी नहीं होती कार्रवाई-
गौरतलब है कि इससे पहले भी हमारी सरकार ने उजियारपुर में उचित मूल्य की दुकान के संचालक के परिजनों के नाम जारी फर्जी राशन कार्डों की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसकी  विभाग के अधिकारियों को लिखित में शिकायत भी की जा चुकी है ।  इसके बावजूद खाद्य निरीक्षक मयंक श्रीवास्तव एवं सहायक खाद्य अधिकारी एस के मिश्रा के द्वारा संचालक को बचाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। सवाल उठता है कि आखिर क्यों कोई खाद्य निरीक्षक किसी दुकानदार को बचाने का प्रयास कर रहा है? उनके इस कृत्य के कारण ही गांव के नजाने कितने घरों में अंधेरा पसरा रहता है। ग्रामीणों को बरसात में सांप-बिच्छू काटते हैं।
नही मिलता मिट्टी तेल-
        जिन्हे वास्तव में मिट्टी तेल की जरूरत होती है उन्हे नही दिया जाता जबकि ग्रामीण क्षेत्र में मिट्टी तेल की मांग आज भी बनी हुई है और इधर सेल्समेन राशन की कालाबाजारी करने से बाज नही आ रहे हैं।

नियम से कार्रवाई हो तो जेल जाने का है प्रावधान-
        जानकारों की माने तो पीडीएस के तहत वितरण होने वाले मिट्टी तेल की कालाबाजारी करते हुए धरे जाना गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। प्रदेश में ऐसे मामले भरे पडे हैं जिसमें अरोपी जेल तक दाखिल हुए हैं। फिर भी विभाग के अधिकारी आरोपी को बचाने हर संभव प्रयास करते नजर आ रहे हैं।
15 दिनों से अटकी जॉच एवं कार्रवाई
        ज्ञात हो कि फर्जी राशन कार्ड से संबंधित खबर प्रकाशन के बाद विभाग हरकत में आया था किन्तु जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे हैं विभाग इन्हे बचाने भरपूर जोर आजमाईश करती नजर आ रही है, वहीं जब 270 लीटर मिट्टी तेल से संबंधित मामला सामने आने पर भी न ही जप्ती की कार्रवाई की गई और न ही अपराध पंजीबद्ध किया गया। ऐसे में विभाग की संलिप्तता स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।
वर्जन-
आपके कहने से थोड़े होगा। जब हमारा फूड इंस्पेक्टर खाली रहेगा तो चला जाएगा।
एस.के. मिश्रा
सहायक खाद्य अधिकारी
लोरमी

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