रहिमन तोता पालिए

कटाक्ष-

निखट्टू
प्रदेश में पिछले साल भयंकर सूखा पड़ा। मंत्री जी बैठक में व्यस्त रहे। बस्तर में बाढ़ आई मंत्री जी बैठक में। कांकेर के कर्रामाड़ में 3 सौ गायें भूख से मर गईं मंत्री जी बैठक में। राज्य में अंखफोड़वा कांड हुआ मंत्री जी बैठक में। बिलासपुर जब लाश पुर बन गया तब भी वे बैठक में। सवाल ये उठता है कि आखिर ये बैठकों में करते क्या हैं? कामधाम तो इनसे होता नहीं? राज्य में अभी जो हालात हैं उसको देखकर तो कतई नहीं लगता कि प्रदेश के मुखिया की कैबिनेट कोई काम भी कर रही है। बस एक ही चीज समझ में आती है कि ऊपर वाले के यहां से सुख लिखवा कर लाए थे यहां आकर भोग रहे हैं। प्रदेश की सारी सेवाएं बदहाल पड़ी हैं। अपराध बढ़ता जा रहा है। बहन -बेटियों का सड़कों पर निकलना मुश्किल होता जा रहा है और मंत्री जी मीटिंग में व्यस्त हैं।अधिकारी सेवा के नाम पर मेवा खा रहे हैं। ठेकेदार देश के विकास का नाश कर रहे हैं। मिशन कमीशन जोरों से जारी है, मंत्री जी बैठक में हैं। इसके लिए तो कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। इतना बड़ा बंगला इतनी मोटी तनख्वाह अनगिनत सुविधाएं और तमाम लोगों की ड्यूटी इनकी सुरक्षा में लगी है। हमारी तो भारत सरकार को ये राय है कि ऐसे लोगों को पालने से ज्यादा अच्छा होगा कुछ तोते पाल लीजिए। उनको यही सिखा दीजिए कि जब कोई कुछ पूछे कह देना कि मीटिंग में हैं...काम खत्म? यानि सीधी सी बात कि रहिमन तोता पालिए।
 इसका फायदा ये होगा कि गरीबों का पैसा भी बच जाएगा और देश का विकास भी इससे ज्यादा तेजी से होगा। तोता पालने के लिए किसी टेंडर की जरूरत नहीं पड़ेगी। अरे वन विभाग के अधिकारियों को बोल दिया जाएगा। कि इस बार पक्षी दलालों को तोते न बेंचकर सरकार को बेंच देंगे? बस काम हो जाएगा। तोते बड़ा होने में ज्यादा समय भी नहीं लेते उनको ज्यादा कुछ खाने को भी नहीं देना होगा। लिहाजा देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में भी इतनी सारी कुर्सियां डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दस-बीस खूंटियां गाड़कर उनमें तार कसवा दिया जाएगा और उन्हीं में पिंजरों को लटका दिया जाएगा। जैसे मंत्री जी देश की समस्याओं को पिछले छह दशकों से लटका कर रखे हैं। उसके बाद विपक्ष के तोते जो भी जानकारी चाहेंगे पक्ष में लटके पिंजरों से तत्काल ही मिल जाया करेगी। कसम से ये लोग बिल्कुल भी झूठ नहीं बोलेंगे और न ही ये बहाना करेंगे कि हम मीटिंग में हैं। आप य$कीन मानिए कि भारतीय तोते ईमानदार होते हैं बस इनमें एक ही खामी है नज़रें फेर लेने की। इसमें तो नेता इनके भी बाप हैं। इसको अगर छोड़ दिया जाए तो इनको जो भी आप रटाएंगे से वही आपको सुनाएंगे.. समझ गए न सर.... तो अब हम भी निकल लेते हैं अपने घर। कल फिर आपसे मुलाकात होगी तब तक के लिए जय...जय।
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