और लो अच्छे दिन
कटाक्ष-
निखट्टू-
देश के एक होनहार चौकीदार ने अपनी नियुक्ति के पहले देश की जनता को अच्छे दिनों के अच्छे-अच्छे सपने दिखाए थे। सभाओं ने नारे भी लगे थे अच्छे दिन आएंगे। उन्होंने वादा भी किया था कि अच्छे दिन लाएंगे। अब उनकी नौकरी तो पक्की हो गई तो अपने सहयोगियों और खास को मनमाना पैसा देकर गरीबों का खजाना खाली करने पर तुले हैं। हमारे मोहल्ले के रामलाल की साइकिल तीन दिनों से पंक्चर हो चुकी है। वो बेचारा बाजार और दफ्तर पैदल जाता है। और वो चौकीदार राजहंस पर चढ़कर दौरे पर दौरे किए जा रहा है। कुछ लोग तो ये भी कहने लगे हैं कि उसके ये दौरे तब तक नहीं थमने वाले जब तक कि देश के खजाने को मिर्गी का दौरा न पड़ जाए? अब हम ये भी तो नहीं मना सकते कि हमारे देश के खजाने को जल्दी मिर्गी आए? वैसे भी उनके हेलकॉप्टर के पंखों को लगातार घूमता देखकर मेरा सिर जरूर घूमने लगता है। कसम से कई बार उल्टियां कर चुका हूं। मगर देश का चालाक चौकीदार है कि न विमानों से उतर रहा है और न ही विदेशों के दौरे बंद कर रहा है। अब खजाने का हाल तो राम जाने। अरे अब इससे ज्यादा आपको और क्या बताएं... एक जने रहे रिजर्व बैंक के गवर्नर नाम था रघुराम राजन काफी पहले एक बार इस चौकीदार पर धीरे से गुर्राए थे। गलती से आवाज कान तक जा पहुंची उनका कान पकड़कर ऐसा ऐंठा कि वे राजा न रहे । रघुपतिराघव राजा राम पतित पावन सीताराम गाते हुए वानप्रस्थगामी हो गए। वैसे जब से उन्होंने देश की चौकीदारी संभाली है बड़े-बड़े लोग भी आ रहे हैं हमारे देश में। पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग आए, फिर अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा आए, उसके बाद रूस के प्रधानमंत्री मेदवोदेव आए और उसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति आलांद भी आए। इतने बड़े-बड़े लोग तो आए मगर अगर कोई नहीं आया तो वो हैं अच्छे दिन। ये अच्छे दिन को कितना बुलाया जा रहा है जहां इतने बड़े-बड़े लोग आते हों वहां तो दौड़कर जाना चाहिए कि नहीं? अब ऐसे इतरा रहा है जैसे भारत में आएगा तो भारत वाले उसको नोंचकर खा जाएंगे। मैं तो इस कम्बख़्त अच्छे दिन को मनाते-मनाते इतना मनाया कि उसकी आत्मा ने लगता है उसको यहां आने से ही साफ मना कर दिया। अब आप लोग मनाइए कि हे अच्छे दिन महराज आप भारत में आइए। तो अब देख क्या रहे हैं अरे शुरू हो जाइए सर....और हम धीरे से निकल लेते हैं घर क्योंकि अगर जल्दी नहीं गए तो हमारी ख़्ाातून-ए $खाना रूठ कर मायके चली जाएंगी। क्या कहा नहीं समझे अरे आपके अच्छे दिन के चक्कर में हमारी लुगाई मायके चली जाएगी मेरे भाई...अब बात समझ में आई? तो फिर कल आपसे फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए जय...जय।
-
निखट्टू-
देश के एक होनहार चौकीदार ने अपनी नियुक्ति के पहले देश की जनता को अच्छे दिनों के अच्छे-अच्छे सपने दिखाए थे। सभाओं ने नारे भी लगे थे अच्छे दिन आएंगे। उन्होंने वादा भी किया था कि अच्छे दिन लाएंगे। अब उनकी नौकरी तो पक्की हो गई तो अपने सहयोगियों और खास को मनमाना पैसा देकर गरीबों का खजाना खाली करने पर तुले हैं। हमारे मोहल्ले के रामलाल की साइकिल तीन दिनों से पंक्चर हो चुकी है। वो बेचारा बाजार और दफ्तर पैदल जाता है। और वो चौकीदार राजहंस पर चढ़कर दौरे पर दौरे किए जा रहा है। कुछ लोग तो ये भी कहने लगे हैं कि उसके ये दौरे तब तक नहीं थमने वाले जब तक कि देश के खजाने को मिर्गी का दौरा न पड़ जाए? अब हम ये भी तो नहीं मना सकते कि हमारे देश के खजाने को जल्दी मिर्गी आए? वैसे भी उनके हेलकॉप्टर के पंखों को लगातार घूमता देखकर मेरा सिर जरूर घूमने लगता है। कसम से कई बार उल्टियां कर चुका हूं। मगर देश का चालाक चौकीदार है कि न विमानों से उतर रहा है और न ही विदेशों के दौरे बंद कर रहा है। अब खजाने का हाल तो राम जाने। अरे अब इससे ज्यादा आपको और क्या बताएं... एक जने रहे रिजर्व बैंक के गवर्नर नाम था रघुराम राजन काफी पहले एक बार इस चौकीदार पर धीरे से गुर्राए थे। गलती से आवाज कान तक जा पहुंची उनका कान पकड़कर ऐसा ऐंठा कि वे राजा न रहे । रघुपतिराघव राजा राम पतित पावन सीताराम गाते हुए वानप्रस्थगामी हो गए। वैसे जब से उन्होंने देश की चौकीदारी संभाली है बड़े-बड़े लोग भी आ रहे हैं हमारे देश में। पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग आए, फिर अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा आए, उसके बाद रूस के प्रधानमंत्री मेदवोदेव आए और उसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति आलांद भी आए। इतने बड़े-बड़े लोग तो आए मगर अगर कोई नहीं आया तो वो हैं अच्छे दिन। ये अच्छे दिन को कितना बुलाया जा रहा है जहां इतने बड़े-बड़े लोग आते हों वहां तो दौड़कर जाना चाहिए कि नहीं? अब ऐसे इतरा रहा है जैसे भारत में आएगा तो भारत वाले उसको नोंचकर खा जाएंगे। मैं तो इस कम्बख़्त अच्छे दिन को मनाते-मनाते इतना मनाया कि उसकी आत्मा ने लगता है उसको यहां आने से ही साफ मना कर दिया। अब आप लोग मनाइए कि हे अच्छे दिन महराज आप भारत में आइए। तो अब देख क्या रहे हैं अरे शुरू हो जाइए सर....और हम धीरे से निकल लेते हैं घर क्योंकि अगर जल्दी नहीं गए तो हमारी ख़्ाातून-ए $खाना रूठ कर मायके चली जाएंगी। क्या कहा नहीं समझे अरे आपके अच्छे दिन के चक्कर में हमारी लुगाई मायके चली जाएगी मेरे भाई...अब बात समझ में आई? तो फिर कल आपसे फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए जय...जय।
-
Comments