भतीजे ने चाची की लाश से वसूली 5 डिसमिल जमीन
बेटियों ने दिया सड़क के किनारे की 5 डिसमिल जमीन, 48 घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद लगाई चिता को आग
-समाज में फैली लालच द्वेष की इंतिहा इंसान को दरिंदगी की उस पराकाष्ठा पर ले जाती है, जहां उसके सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। जब न तो उसे खून के रिश्ते नजर आते हैं, न मानवता नजर आती है और न ही उसके लिये मासूमियत कोई मायने रखती है। ठीक ऐसा ही कृत्य कल्याणपुर में हुआ। जहां माँ के अंतिम संकार की कीमत बेटियों को 5 डिसमिल जमीन देकर चुकानी पड़ी। इसी जमीन के लिए लोभी भतीजे ने मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए कराया 48 घंटे तक इंतजार । पहले बहनों से सड़क के किनारे की 5 डिसमिल जमीन ली उसके बाद अपनी चाची की लाश को मुखग्रि दी। इस शर्मनाक घटना की चारों ओर निंदा हो रही है।
अम्बिकापुर।
मां की मौत पर रोने का बेटियों को नहीं मिला मौका-
सूरजपुर के कल्याणपुर गांव में समाज व मावनता को झकझोरने वाला एक सच सामने आया है। यहां गांव की 85 वर्षीय वृद्ध महिला की लाश अंतिम संस्कार के लिये पड़ी हुई थी,जबकि उसकी दोनों पुत्री भी अपनी मां की मौत की सूचना पर आ गईं पर अपनी मां का अंतिम दाह संस्कार कराने के लिए उनको काफी मशक्कत करनी पड़ी। आलम ये रहा कि बेटियों को अपनी मां की लाश से लिपट कर रोने तक का मौका नहीं मिला। इसके लिए उसके मामा के लड़के ने शर्त रखी थी कि जब तक सड़क किनारे 5 डिसमिल जमीन जब बेटियों ने नहीं दी तब जाकर मृतका के लालची भतीजे ने उसका अंतिम संस्कार नहीं किया।
क्या है पूरा मामला-
दरअसल गांव में रहने वाली मृतक 85वर्षीय बिफईया साहु के पति का 3 वर्ष पहले निधन हो गया था। मौत से पहले ही पिता ने दो बेटियों की शादी कर उनका घर बसा दिया था। कोई बेटा न होने के कारण अपनी पूरी जमीन जायदाद अपने भांचा के नाम कर दिया था। समय गुजरता रहा और इसी बीच बिफईया की भी मृत्यु हो गई लेकिन उसकी लाश 48 घंटे से ज्यादा समय तक लावारिश की तरह अपने अंतिम क्रिया की बाट जोहती रही। पर लालची भतीजे ने साफ फरमान सुना दिया कि अंतिम संस्कार तो वो तभी करेगा जब उसको सड़क के किनारे की 5 डिसमिल जमीन उसकी दोनों बहने दे देंगी।
नहीं मानी पंचायत की भी बात-
जबकि मृतक के घर के सामने सरपंच- पंचों की पंचायत भी लगी। कई कागजात पेश किये गये परंतु वो लालची भतीजा आखिर निरा लालची ही ठहरा उसने पंचों को भी साफ-साफ कह दिया कि इससे कम पर वो अंतिम संस्कार करने वाला नहीं। अंत में मृतका की बेटियों ने सड़क किनारे की 5 डिसमिल जमीन देनें का वादा किया जिसके बाद मृतिका के कलियुगी भतीजे ने उसका अंतिम संस्कार किया।
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