सर्जिकल की ओट से

खटर-पटर-

निखट्टू-
संतों...हिंदुस्तान में नेता नामक जो कौम है, इसको हमेशा किसी न किसी की ओट लेकर ही चोट मारने में मजा आता है। कभी धर्म तो कभी मज़हब, कभी भाई-भतीजावाद, कभी जातिवाद, कभी संप्रदायवाद और कुछ नहीं मिला तो वाद-विवाद। महाभारत के अद्वितीय महारथी गंगापुत्र भीष्म को जब अर्जुन ने मारने का प्लान बनाया था। तो उस वक्त भी यही मंत्र काम आया था। शर्त थी कि अर्जुन शिखंडी नामक तृतीय लिंग के व्यक्ति की आड़ लेकर वाण चलाएंगे। अर्जुन ने वैसा ही किया और दुनिया में अजेय माने जाने वाले पराक्रमी योध्दा गंगापुत्र भीष्म वाणों की शैय्या पर आ गिरे। भारत में आज फिर वही महाभारत काल का इतिहास दोहराया जा रहा है। देश में तथाकथित रंगीन डिग्रीधारी और उच्च गुण सम्पन्न, कुशल वक्ता नेताओं ने इस जिम्मेदारी को संभाल लिया है। इनका विवेक देखकर तो बच्चे भी शर्माने लगे हैं। इनको इतना भी विवेक नहीं कि ये बोल क्या रहे हैं और उसका हमारे पड़ोसी पर क्या असर होगा? बस मौका मिला है तो पिले रहो। आखिर बोलना ही तो है न? बोलते जाओ। कौन है जो रोकेगा और कौन टोकेगा? सेना के सर्जिकल वॉर को लेकर इन लोगों ने सेना की अस्मिता पर इतने वॉर किए कि उतनी तो आतंकियों ने गोलियां तक नहीं चलाई होंगी? हद हो गई भाई....समझ में नहीं आता कि ये भारतीय हैं भी या नहीं? इनकी बातों से तो किसी भी कोण से ये नहीं लगा कि ये लोग भारतीय भी हो सकते हैं। उधर पस्त हो चुके पाकिस्तान को इनकी इन बचकानी हरकतों से संजीवनी बराबर मिलती रही। लिहाजा वो अपना काम सोशल साइट्स पर करता गया।  सेना के काम पर सवालिया निशान लगाने वाले नेताओं ने अपने कुकर्मों की अटैची किस आलमारी में छिपाकर रख दी थी किसी को भी पता नहीं। ऐसे लोग भी सेना को चीख-चीखकर कठघरे में खड़ा करने की दुहाई दे रहे थे। गोया सेना ने पाकिस्तान के उग्रवादियों को नहीं बल्कि उनके भाई-भतीजों को मार दिया हो? समझ में नहीं आता कि आखिर इनको पाकिस्तान से इतना मोह क्यों है? पाकिस्तान हमारी सेना के जवानों को जब तब मारता रहता है। अपने देश के उन शहीदों के लिए तो इनका खून कभी नहीं खौला? पहले यही पाकिस्तान हिंदुस्तान को जब -तब धौंस दिखाता रहता था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री ने उस वक्त पाकिस्तान को क्या कहा? कहां थे देश के युवा आईकॉन राहुल गांधी? क्यों नहीं बोले ? देश की राजधानी में जिस निर्ममता के साथ एक युवती के साथ बलात्कार की शर्मनाक करतूत करने के बाद उसको अधमरा छोड़ दिया जाता है। सरकार कान में तेल डाले बैठी रही। पूरा देश एक स्वर में चिल्लाया वी वांट जस्टिस। उस रोज कहां थे ये कांग्रेस के आईकॉन राहुल गांधी? कही थीं सोनिया गांधी, कहां थे मनमोहन  सिंह। जब उस लड़की की हालत बिगड़ती है तब सरकार की नींद टूटती है कि इसका इलाज भी करवाना है। तब उसे विदेश भेजा जाता है। मरने पर एयरपोर्ट पर रात को चुपचाप जाकर देश के प्रधानमंत्री उसको श्रध्दांजलि देकर सरक लेते हैं। किसी भी दशा में ऐसा कार्य किसी प्रधानमंत्री का हो सकता है क्या? इतने दिनों तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही पर किया क्या? सिवाय मुद्दों और मुद्दइयों को दूध पिलाने के? ऐसे में जो भी सेना की वर्दी पर दाग़ लगाने की कोशिश में है वो पहले अपनी कमीज जरूर देख ले....। क्यों समझ गए न सर... तो अब हम भी निकल लेते हैं अपने घर...कल फिर आपसे मुलाकात होगी तब तक के लिए जय....जय।
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