ये दाऊ कोनो तो देवाय दे मोला पेंशन...!
शासन की योजनाएं तो इतनी है कि उसकी गिनती लगाना मुश्किल है पर शासन की इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को मिल रहा है या नहीं यह देखने वाला कोई नहीं है। यहां प्रशासन का हाल भी माशाअल्लाह है। आप शिकायत पर शिकायत करते रहिए कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है। ऐसा ही एक मामला आज भैयाथान ब्लॉक के ग्राम कोटेया का सामने आया, जिसमें राष्ट्रपति की दत्तक पुत्री कही जाने वाली एक पण्डो जनजाति की एक महिला विधवा पेंशन के लिए पिछले पांच वर्ष से भटक रही है। आज ग्राम सभा में उसने फिर से अपनी बात रखी है। आंखों में आंसू और कांपती जुबान से इतना ही बोल सकी कि ये दाऊ कोनो तो देवाए दे मोला पेंशन.....। इससे आगे कुछ भी नहीं बोल सकी। ग्राम सभा में मौजूद जिला पंचायत के उपाध्यक्ष गिरीश गुप्ता ने महिला को आश्वस्त किया है कि शासन की योजना का लाभ उसे मिलेगा इसके लिए उन्होने सरपंच सचिव को ताकीद भी किया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि महिला को कब तक विधवा पेंशन की राशि मिल पाती है।
० पांच वर्ष से विधवा पेंशन के लिए भटक रही राष्ट्रपति की दत्तक पुत्री,
सूरजपुर।
क्या है पूरा मामला-
बताया गया है कि ग्राम कोटेया की इन्द्रकुवंर (60)के पति धनुषधारी की मौत पांच वर्ष पूर्व हो गई थी। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पण्डो जनजाति की इस महिला का कोई नहीं है। ऐसे में उसे उम्र के इस प$डाव पर जीवन यापन के लिए बेहद कठिनाईयों का सामना करना प$ड रहा है। सरकार की विधवा पेंशन की उम्मीद थी और इसके लिए उसने दर -दर में फरियाद भी लगाई, लेकिन शासन की योजनाओं की शेखी बघारने वाले किसी नुमाईदे ने इस बुजुर्ग महिला की फरियाद तक नहीं सुनी। बहरहाल, कोटेया में आज विशेष ग्राम सभा आयोजित थी वहां भी महिला उक्त फरियाद लेकर पहुंची थीं। जहां फिलहाल आश्वासन का पुलिंदा मिला है। देखना यह है कि उसे कब तक योजना का लाभ मिल पाता है?
कलेक्टर ने नहीं उठाया फोन-
इस मामले पर जब हमारी सरकार की टीम ने सुरजपुर के कलेक्टर गोविंदराम चुरेंद्र से उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऐसे में ये बात साफ-साफ समझ में आ जाती है कि सातवां वेतनमान लेने वाले श्रीमान कितना काम कर रहे हैं?
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