बयानबाज नेताओं को नसीहत
सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर पाकिस्तानी प्रवक्ताओं की तरह सवाल करने वाले देश के कुछ तथाकथित नामीगिरामी नेताओं के चेहरे उस वक्त लटक गए। जब पाकिस्तान की पुलिस ने ही कबूल लिया कि हां भारतीय सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था। इसके बाद से इनसे कुछ भी कहते नहीं बनता है। तो वहीं अमेरिकी सेना मुख्यालय के जानकार सूत्रों ने भी अपने सैटेलाइट की तस्वीरों का हवाला देते हुए ऐसी कार्रवाई की बात कही है। इसके बाद तो पाकिस्तान की अवाम ने भी ये माना कि अगले दिन की अल सुबह वहां से ट्रकों पर शवों को लाद -लाद कर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। जहां उनको कब्र दी गई। इतने सुबूतों के मिलने के बाद तो अब उन बयानबाज तथाकथित नेताओं से कुछ भी बोलते नहीं बन रहा है। सब के सब अपने-अपने फोन या तो बंद कर दिए हैं और या तो पीए से मेल मंगवा रहे हैं। हमारी सरकार ने भी अपने सवाल अरविंद केजरीवाल को मेल किए हैं।
सवाल तो ये है कि जिसको अपने देश की सेनाओं पर ही शक हो वो भला देश या फिर देश की जनता पर क्या भरोसा करेगा? देश में रहकर पाकिस्तान की सोच रखने वाले नेताओं से देश की जनता अब क्या उम्मीद रखे? क्या ऐसे नेताओं की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? लगातार मोटा वेतन और भत्ता बटोरकर अपने खातों में ठूंसने वाले नेता आखिर काम कितना करते हैं? अरविंद केजरीवाल खुद बता दें....सीएम बनने के बाद उन्होंने कितनी बिजली की लाइनों का केबल काटा है? कितनी बार बिजली के खंभे पर चढ़े हैं? कितनी बार राजधानी की अस्पतालों का दौरा किया और वहां की दवाओं की आपूर्ति का ब्यौरा जानने की कोशिश की है? दिल्ली की जनता मरी जा रही है तो वहां एक्सपायरी दवाओं से फॉगिंग करवाई जा रही है।
तो वहीं संजय निरुपम का भी वही हाल है। खाली बड़ी-बड़ी बातें करने से काम नहीं बनता कुछ देश के लिए भी करना होता है। आज तक इन महाशय ने देश के लिए क्या किया है? कुछ भी नहीं...कांग्रेस की कुर्सी मिल गई तो खुद को खुदा समझ बैठे हैं। सेना ने अपनी बहादुरी का सुबूत दिया। अब देश की सवा अरब की जनता का ये सीधा सा सवाल है कि नेता अपनी ईमानदारी के सुबूत कर पेश करेंगे वो बता दें?
पाकिस्तानी प्रवक्ताओं की बेशर्म भाषा बोलने वाले इन नेताओं को चाहिए कि वे नैतिकता के आधार पर तत्काल अपने -अपने पदों से इस्तीफा देकर देश की जनता और सेना के जवानों से सार्वजनिकतौर पर माफी मांगें। यदि ये ऐसा नहीं करते हैं तो हर सक्षम भारतीय का नैतिक कर्तव्य बनता है कि इनके खिलाफ सक्षम न्यायालयों में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया जाए, ताकि फिर देश का कोई भी तथाकथित नेता देश की सेनाओं के कार्यों पर इस तरह का घटिया और शर्मनाक बयान न दे सके।
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