सड़कों का बंटाधार करते ठेकेदार
सड़कें किसी भी देश की धमनियां होती हैं। जिनमें से होकर पूरा देश दौड़ता है। हमारे देश में सड़कों का बहुत बड़ा संजाल बिछा हुआ है। तो वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से पूरे देश के बड़े-बड़े शहर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनके निर्माण में खरबों रुपए खर्च हो चुके हैं। तो वहीं इनकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ निकृष्ट नेताओं और भ्रष्ट अफसरशाही का फायदा उठाकर ठेकेदार इनकी गुणवत्ता का बंटाधार कर चुके हैं। इसमें पेंच ये है कि अब उनके भ्रष्टाचार के गड्ढे में गिरकर वो आदमी मर रहा है जिसकी जेब का पैसा इस सड़क को बनाने में प्रयोग किया गया है। तो वहीं उस पैसे को लूट कर आराम से वातानुकूलित कमरे में बैठा ठेकेदार और सरकारी चौपर में घूम रहा वो नेता तथा उसका पालतू अधिकारी आराम से तमाशबीन बनें बैठे हैं।
सरकार नई दिल्ली से जो टीम इन सड़कों की निगरानी करने के लिए समय-समय पर भेजती है उन अधिकारियों को भी ये ठेकेदार मेहमाननवाज़ी करवा कर वापस भेज देते हैं। ऐसे में किसी भी सड़क की गुणवत्ता ठीक नहीं है। जिनको लूटना था वे लूट चुके हैं जिसकी जान जानी थी जा चुकी है। जिनकी टांग-टूटनी थी उनकी टूट चुकी है। इससे इन अधिकारियों और कर्मचारियों का क्या। अलबत्ता नेताजी किसी की मौत पर आते हंै तो भारी-भरकम राशि की मांग कर जनता के कृपापात्र बननेे की कोशिश करने में लग जाते हैं।
सरकार को चाहिए कि दुर्घटना करने वाले चालक और वाहन मालिक के साथ ही साथ उस सड़क के ठेकेदार को भी हर मामले में पक्षकार बनाया जाए। इसके अलावा उसका साथ देने वाले अधिकारियों को तत्काल निकाल कर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए। सवाल तो ये भी है कि क्या देश की धमनी खराब करने वाला ठेकेदार देशद्रोही नहीं है? अगर है तो फिर ऐसे लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मामले क्यों दर्ज नहीं किए जाते?
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