सकते में शहर और सवालों के घेरे में पुलिस




रायपुर। हेलमेट के नाम पर गरीबों को हलाकान करने में जुटा रहा पूरी पुलिस का अमला और अपराधी करके व्यापारियों पर हमला लूट चुके कई लाख। फिर भी नहीं खुल रही पुलिस की आंख। दस महीने में सात गोलीकांड होने के बावजूद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। अवैध हथियारों की फैक्ट्री चलाने वाला डॉक्टर अभी सलाख़्ाों के पीछे बताया जा रहा है। तो वहीं राजधानी के अपराधियों के हाथों हुए अपराधों में कट्टे जैसे हल्के हथियारों का प्रयोग होना बताया जा रहा है। सवाल तो ये है कि क्या राजधानी की पुलिसिंग एकदम ध्वस्त और पस्त हो चली है? दूसरा सवाल तो ये भी है कि गरीबों और असहायों पर लाठियां भांजने वाली पुलिस के हाथ इन अपराधियों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं? या फिर पुलिस जानबूझकर इन तक पहुंचना ही नहीं चाहती?
क्या है पूरा मामला-
राजधानी के लालपुर इलाके में बीते शनिवार को शराब की दुकान में लूटपाट हुई। बदमाशों ने काउंटर पर बैठे शख्स को गोली भी मारी थी। ये पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी में कैद तो  हो गई,मगर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को तस्वीर धुंधली नज़र आ रही है। ऐसे में सवाल तो यही है कि जांच को कैसे आगे बढ़ाया जाए?
टिकरापारा के आभूण व्यापारी की हत्या और लूट-
इससे पहले ही यहीं के पचपेड़ी नाका पर एक आभूषण व्यवसाई से ढाई लाख की लूट कर अपाधियों ने उसको गोली मार दी। इससे उसकी मौत भी हो गई और पुलिस सुराग तलाशने में लगी है।
दस महीने में सात गोलीकांड
रायपुर में बीते दस महीने में सात गोलीकांड हो चुके हैं, लेकिन पुलिस किसी भी मामले  शेष पृष्ठ 5 पर...

 में अवैध हथियारों के तस्करों तक नहीं पहुंच पाई है। इसके लिए जिला पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की टीम अलग से काम कर रही है। पुलिस क्लू के सहारे लिंक तलाशती है, लेकिन असली तस्करों तक नहीं पहुंच पाती है। हालांकि दो महीने में इस जांच टीम को एक दर्जन अवैध हथियार जरूर मिले हैं।
होम्योपैथिक डॉक्टर के घर से मिली थी हथियारों का जखीरा-
28 अगस्त की रात को पुलिस ने छापेमारी कर टैगोर नगर निवासी होम्योपेथिक डॉक्टर अनिरूद्ध चटर्जी और साथी राजेश पाल के घर से जिन असलहों को बरामद किया। उनको देखकर वहां मौजूद लोग भी सन्न रह गए।
ये हुआ था बरामद-
315 बोर की मोडीफाईड गन12 बोर की गन, 32 रिवाल्वर148 नग जिंदा कारतूस529 नग खाली राउंड22 के छर्रे के 16 डिब्बे01 गन पावडर का पार्सल10 एअर गन पार्ट्स8 रिवाल्वर ग्रिप्स1 एयर गन बैरल4 रायफल बट1 रायफल हैंडलन1 हैंड ग्राइंडर, 1 कटर मशीन2 एयरगन1 डमी गन1 एयर पिस्टल1 डमी रिवाल्वर 20 प्लेन तीर।  तलवारें2 कटार, 14 गंडासा3 बटनदार-2 धारदार चाकू2 भाला-3 फरसा और 1 खुखरी।
राजधानी में हो रही हत्याओं में ज्यादातर कट्टे का ही प्रयोग-
यहां ध्यान देने वाली बात तो यही है कि जो भी हत्याएं हो रही हैं उनमें से अधिकांश में कट्टे का ही प्रयोग हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में पुलिस एक बार भी डॉक्टर अनिरुध्द से इसके खरीदारों के बारे में जानकारी नहीं लेना चाह रही है क्यों? हो सकता है कि कोई न कोई सुराग जरूर निकल आए? सवाल तो ये भी है कि कहीं ये सारे  असलहे आरोपी डॉक्टर अनिरुध्द ने तो बदमाशों को नहीं बेचे?
ठंडे बस्ते की ओर मामले-
लगातार हो रही वारदातों के कारण लोगों का ध्यान अब इस मामले से हटता जा रहा है। तो वहीं पुलिस भी इस मामले को ठंडे बस्ते में ही डालकर रखना चाहती है। प्रदेश में जांच के नाम पर क्या नाच हो रहा है ? ये बात इस मामले को देखकर साफ तौर पर समझी जा सकती है।
क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक-
रायपुर एसपी डॉ संजीव शुक्ला कहना है कि हथियारों की सप्लाई करने वालों तक पहुंचने के लिए क्राइम ब्रांच और  पुलिस के कुछ अफसरों को लगाया था। हथियार कहां से आ रहे हैं इस बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि हथियारों के सौदागरों तक हम नहीं पहुंच पा रहे हैं।
 में अवैध हथियारों के तस्करों तक नहीं पहुंच पाई है। इसके लिए जिला पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की टीम अलग से काम कर रही है। पुलिस क्लू के सहारे लिंक तलाशती है, लेकिन असली तस्करों तक नहीं पहुंच पाती है। हालांकि दो महीने में इस जांच टीम को एक दर्जन अवैध हथियार जरूर मिले हैं।
होम्योपैथिक डॉक्टर के घर से मिली थी हथियारों का जखीरा-
28 अगस्त की रात को पुलिस ने छापेमारी कर टैगोर नगर निवासी होम्योपेथिक डॉक्टर अनिरूद्ध चटर्जी और साथी राजेश पाल के घर से जिन असलहों को बरामद किया। उनको देखकर वहां मौजूद लोग भी सन्न रह गए।
ये हुआ था बरामद-
315 बोर की मोडीफाईड गन12 बोर की गन, 32 रिवाल्वर148 नग जिंदा कारतूस529 नग खाली राउंड22 के छर्रे के 16 डिब्बे01 गन पावडर का पार्सल10 एअर गन पार्ट्स8 रिवाल्वर ग्रिप्स1 एयर गन बैरल4 रायफल बट1 रायफल हैंडलन1 हैंड ग्राइंडर, 1 कटर मशीन2 एयरगन1 डमी गन1 एयर पिस्टल1 डमी रिवाल्वर 20 प्लेन तीर।  तलवारें2 कटार, 14 गंडासा3 बटनदार-2 धारदार चाकू2 भाला-3 फरसा और 1 खुखरी।
राजधानी में हो रही हत्याओं में ज्यादातर कट्टे का ही प्रयोग-
यहां ध्यान देने वाली बात तो यही है कि जो भी हत्याएं हो रही हैं उनमें से अधिकांश में कट्टे का ही प्रयोग हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में पुलिस एक बार भी डॉक्टर अनिरुध्द से इसके खरीदारों के बारे में जानकारी नहीं लेना चाह रही है क्यों? हो सकता है कि कोई न कोई सुराग जरूर निकल आए? सवाल तो ये भी है कि कहीं ये सारे  असलहे आरोपी डॉक्टर अनिरुध्द ने तो बदमाशों को नहीं बेचे?
ठंडे बस्ते की ओर मामले-
लगातार हो रही वारदातों के कारण लोगों का ध्यान अब इस मामले से हटता जा रहा है। तो वहीं पुलिस भी इस मामले को ठंडे बस्ते में ही डालकर रखना चाहती है। प्रदेश में जांच के नाम पर क्या नाच हो रहा है ? ये बात इस मामले को देखकर साफ तौर पर समझी जा सकती है।
क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक-
रायपुर एसपी डॉ संजीव शुक्ला कहना है कि हथियारों की सप्लाई करने वालों तक पहुंचने के लिए क्राइम ब्रांच और  पुलिस के कुछ अफसरों को लगाया था। हथियार कहां से आ रहे हैं इस बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि हथियारों के सौदागरों तक हम नहीं पहुंच पा रहे हैं।
35 लोगों को उठाया
गया पूछताछ के लिए
टिकरापारा थाने की पुलिस ने मामले को लेकर लगातार प्रयास में लगी है। थाने के टीआई राजेश चौधरी ने बताया कि हमने 35 संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठाया है। उनसे महत्वपूर्ण सुराग भी मिले हैं। मामले की गंभीरता के चलते उन्होंने सुरागों की जानकारी का खुलासा करने से इंकार कर दिया।
टिकरापारा थाने के पीछे अवैध दारू का अड्डा
टिकरापारा में अराजकता के पीछे का कड़वा सच ये है कि यहां थाने के पीछे ही अवैध दारू की भट्टी चलती है। यहां से रोजाना डेढ़ हजार बोतल से ज्यादा अवैध शराब की बिक्री होती है। इस भट्टी को यहां के स्थानीय नेताओं और पुलिस प्रशासन का आशीर्वाद प्राप्त है। इनमें से आठ सौ बोतल तो आज सुबह सरस्वती स्कूल के बगल वाले मैदान में मिलीं। इसके अलावा रात के नौ बजते ही छत्तीसगढऩगर की सड़कों पर असामाजिक तत्वों का कब्जा हो जाता है। शहीद संजय यादव हाईस्कूल में बने आंगनबाड़ी कार्यालय के सामने से लेकर झंडा चौक के आगे पार्षद के दफ्तर के सामने तक ऐसे तत्व आराम फरमाते हैं। जगह-जगह जुए की फड़ भी खुलेआम बैठती है। मोहल्ले में माताओं-बहनों का सड़क पर निकलना दूभर हो चुका है। तो वहीं पार्षद और दूसरे नेता हाथ पर हाथ धरे तमाशबीन बने बैठे हैं। अगर पुलिस प्रशासन इन पर तत्काल कार्रवाई नहीं करती है तो यहां का साम्प्रदायिक सौहार्द जल्दी ही बिगड़ सकता है।

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