उच्च गुणवत्ता वाली पुलिसिंग
राजधानी में बढ़ते अपराध को लेकर जहां लोगों के मन में पुलिस को लेकर गुस्सा है। तो वहीं कोरबा में जिस किसी ने सामुदायिक पुलिसिंग के इस नायाब नमूने को देखा बिना सैल्यूट किए नहीं रह सका। यहां के एक थाना प्रभारी ने कचरे से बीन-बीन कर खाना खा रहे एक विक्षिप्त को देखा और उसे उठाकर थाने ले आए। इसके बाद पुलिस के जवानों ने उसकी शेविंग कराई, बाल कटवाए और उसको शैम्पू लगाकर स्नान कराया। इसके बाद उसको ढंग के कपड़े पहनाए। अब समस्या ये थी कि वो आदमी अर्ध विक्षिप्त था लिहाजा उसको इलाज की जरूरत थी। इन लोगों ने कोर्ट से परमिशन लेकर उसको मेंटल हॉस्पिटल भेजवाया। जहां उसकी हालत में काफी सुधार बताया जा रहा है।
ये देखकर मुझे मारूफ शायर ज़नाब बे$कल उत्साहीं याद आ गए। उन्होंने एक जगह लिखा है कि - साथ में मानवता का सम्मान होना चाहिए, आदमी को पहले इक इंसान होना चाहिए। इंसानियत ही मानवता की पहली शर्त होनी चाहिए। अगर ये मर गई तो समझ लो कि सब कुछ समाप्त हो गया। कोरबा पुलिस के इन जवानों ने नि:संदेह उच्च कोटि की मानवता की मिसाल पेश की। ऐसे जवानों का सम्मान किया जाना चाहिए।
इसका ये मतलब कतई नहीं है कि हम दोषियों को बचाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं। दोषी पुलिस वालों से हमारी कोई हमदर्दी नहीं है। उनके गुनाहों का फैसला अदालत करेगी। तो वहीं अच्छे काम करने वालों की अच्छाई को दबाया भी तो नहीं जा सकता?
राज्य की पुलिस को कोरबा के इन जवानों से सीख लेनी चाहिए। किसी जरूरतमंद की मदद करने से कोई छोटा नहीं हो जाता, और न ही किसी की वर्दी मैली होती है। ऐसे कार्य करते वक्त अगर वर्दी मैली भी होती है तो उसकी चमक कई गुना बढ़ जाती है। लोग ऐसी ही वर्दी को सैल्यूट करते हैं जो उनको संकट से उबारने, आपत्ति में फंसने पर मदद करने के लिए आगे आती हो। ऐसे में तेजी से बदल रहे परिवेश को ध्यान में रखकर ऐसी ही उच्च गुणवत्ता वाली पुलिसिंग की राज्य को जरूरत है। इस बात को सरकार को समझना चाहिए।
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